आस्था का अलौकिक उत्सव; गंगाशहर में 177 वर्ष प्राचीन सांवलिया पार्श्व नाथ जिनालय के द्वार का उद्घाटन

गंगाशहर की पावन धरा सोमवार को दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठी, जब 177 वर्ष प्राचीन श्री सांवलिया पार्श्व नाथ जिनालय (गोल मंदिर) में नवनिर्मित द्वार का शुभ उद्घाटन भक्ति संगीत और सत्तर भेदी पूजा के साथ सम्पन्न हुआ। खरतरगच्छाधिपति आचार्य जिन मणिप्रभ सूरीश्वर महाराज के सान्निध्य तथा गणिवर्य मयंक प्रभ सागर, मेहुल प्रभ सागर, मुनि मंथन प्रभ सागर, बालमुनि मीत प्रभ सागर, साध्वी पदम प्रभा, सुव्रता श्रीजी, साध्वी दीपमाला एवं शंख निधि श्रीजी की प्रेरक उपस्थिति में श्रद्धा और भक्ति का अनुपम वातावरण बना रहा। कार्यक्रम भगवान श्री पार्श्व नाथ मंदिर जीर्णोद्धार ट्रस्ट एवं सेठ फौजराज बांठिया पार्श्व नाथ जैन मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित अंजन शलाका प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत सम्पन्न हुआ। सत्तर भेदी पूजा के दौरान पार्श्व चंद्र गच्छ महिला मंडल की श्राविकाओं ने विविध राग-तर्जों में भक्ति गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। द्वार उद्घाटन के अवसर पर बीकानेर, गंगाशहर, भीनासर सहित देश-प्रदेश से आए श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। ट्रस्ट अध्यक्ष धनपत सिंह बांठिया के नेतृत्व में 58 फीट ऊंचे जिनालय शिखर पर मूलनायक श्री सांवलिया पार्श्व नाथ भगवान की ध्वज पूजा भी संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए धर्म और संस्कृति की समृद्ध परंपरा का प्रतीक माना। समारोह के पश्चात खरतरगच्छाधिपति आचार्यश्री का विहार भी श्रद्धाभाव से सम्पन्न हुआ। आचार्यश्री जिन मणिप्रभ सूरीश्वर महाराज एवं साधु-साध्वी मंडल ने नाल स्थित जिनकुशल दादाबाड़ी में दर्शन-वंदन कर जैसलमेर की ओर प्रस्थान किया, जहां 6 से 8 मार्च तक दादा गुरुदेव चादर महोत्सव आयोजित होगा। विदाई अवसर पर जैन समाज के विभिन्न संगठनों और ट्रस्ट पदाधिकारियों ने मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। यह आयोजन न केवल मंदिर जीर्णोद्धार की पूर्णता का प्रतीक बना, बल्कि जैन समाज की सामूहिक आस्था, अनुशासन और सांस्कृतिक एकजुटता का भी सजीव उदाहरण प्रस्तुत करता है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *