भास्कर न्यूज।लोहरदगा हर घर नल योजना को जल जीवन मिशन का नाम दिया गया परंतु लोहरदगा जिले में यह पूरी तरह से बेकार साबित हो रही है। लोहरदगा जिले के 66 पंचायत अंतर्गत 353 गांव में लगे सोलर आधारित पेयजल आपूर्ति सक्सेसफुल नहीं है। इसमें विभागीय लापरवाही और ठेकेदार की मिली भगत और मनमानी से अब तक सही तरीके से गांव में शुद्ध पेयजल नहीं पहुंच सका है। जिले में करोड़ों की लागत से पूरी की गई जलापूर्ति योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है। सातों प्रखंड में अलग-अलग ठेकेदार द्वारा सोलर आधारित पेयजल आपूर्ति का सोलर जलमीनार लगाया गया, परंतु कहीं पाइप खराब, तो कहीं स्ट्रक्चर अपूर्ण, तो कहीं पाइपलाइन की कमी सहित अन्य परेशानी से अब भी गांव के लोगों को जूझना पड़ रहा है। जिले में लोगों को पीने के पानी की समस्या नहीं हो, इसको लेकर करोड़ों रुपए की लागत से ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति योजना पूरी की गई, लेकिन अधिकतर हैंडपंप और बोरिंग भी खराब हैं। गर्मी में लोग पेयजल संकट से तो जूझ ही रहे हैं। परंतु ठंड में भी पेयजलापूर्ति की परेशानी है। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों को दूर दूर तक पानी को लेकर भटकना पड़ रहा है। हालांकि, राज्य सरकार ने पीने के पानी की समस्या को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति योजना की शुरुआत की, योजना को धरातल पर भी उतारा गया, लेकिन योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 540 से अधिक सोलर बोरिंग लगाया गया। जिन एजेंसी ने बोरिंग और सोलर प्लेट लगाया, उसे पांच सालों तक देखरेख की भी जिम्मेदारी दी गई, लेकिन बोरिंग लगने के कुछ दिनों के भीतर ही ज्यादातर बोरिंग खराब हो गई हैं। स्थिति यह है कि कहीं सोलर खराब है, तो कहीं कंट्रोल पैनल और कहीं जल स्तर नीचे चले जाने की वजह से बोरिंग पानी नहीं दे रहा है। इससे आमलोग पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। परेशान लोग संबंधित एजेंसियों के साथ साथ विभागीय अधिकारियों से शिकायत भी कर रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 6800 हैंडपंप और बड़ी सोलर बोरिंग बेकार पड़े है। कई स्थानों पर जलमीनार भी बनाये गये हैं, जो खराब है। हैंडपंप की मरम्मत को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। स्थिति यह है कि जिले के 353 गांवों में रहने वाले लोगों को शुद्ध पेयजल की सुविधा नहीं मिल रही है। हालांकि, विभाग की ओर से बोरिंग और हैंडपंप की मरम्मत करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। वहीं ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं ठप पड़ी हुई है, स्थिति यह है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद लोगों को पीने का पानी नहीं मिल रहा है। विभाग की ओर से लोगों को बेहतर पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित कराने पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वहीं, एजेंसियां भी सेवा शर्तों को नजरअंदाज कर रही है। इसका खामियाजा आमलोगों को उठाना पड़ रहा है। हर घर नल जल योजना में जिन ठेकेदार को पेमेंट मिला है हुए भी कार्य पूर्ण नहीं किए हैं वही कुछ ठेकेदारों को राशि का भुगतान नहीं होने का रोना रोकर कार्य को आधा अधूरा छोड़ दिए है। जिसके कारण सरकार के द्वारा चलाई जा रही हर घर नल जल योजना फ्लॉप साबित हो रही है। पेयजल व स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता अनूप हांसदा ने कहा कि सभी दृष्टिकोण से जांच की जा रही है। जल्द ही खराब पड़े चापानलों को ठीक कराया जाएगा। इसका चिह्निकरण भी किया जा रहा है।


