बोकारो | आनंद मार्ग प्रचारक संघ ने आनंद नगर में तीन दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया, जिसमें आध्यात्मिक और सामाजिक दर्शन पर चर्चा की गई। शुरुआत प्रभात संगीत, कीर्तन और सामूहिक ध्यान से हुई। आचार्य मोहननंद अवधूत केंद्रीय प्रशिक्षक ने आनंदमूर्ति के आध्यात्मिक और सामाजिक दर्शन पर बात की। कहा कि ब्रह्मांड के सभी प्राणी मनुष्य और अन्य तीन मूलभूत इच्छाओं द्वारा शासित होते हैं। दूसरी इच्छा आनंद और भावनाओं के सागर में बहने की लालसा है। प्रेम और आनंद की निरंतर धारा में डूबे रहना। तीसरी इच्छा कुछ ऐसा करने की लालसा है जो असीम आनंद लाए। ऐसा आनंद जो क्षणिक नहीं बल्कि शाश्वत हो। ये तीनों इच्छाएं जीवन की जड़ हैं। वे चेतना के बीज के रूप में आत्मा के जन्म के साथ ही उत्पन्न होती हैं।


