दौसा जिला मुख्यालय के पास खेड़ली गांव में लोगों ने कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की स्मृति में सार्वजनिक पुस्तकालय शुरू किया है। जिससे गांव के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए शहर जाने की बजाय गांव में ही पढ़ाई के अनुकूल माहौल मिल सके। इसका उद्घाटन सेवानिवृत्त प्रधान आयकर महानिदेशक सुनीता बैंसला ने किया। उन्होंने कहा कि कर्नल बैंसला का जीवन करीब तीन दशक तक समाज में जागृति आंदोलन और नई चेतना को आगे बढ़ाने के लिए समाज के नाम रहा है। उनके जाने के बाद समाज में एक तरह का निर्वात पैदा हो गया, हर कोई चाहता है कि आज भी कर्नल साहब पहले की तरह, हमें प्रेरित करें। इस निर्वात की पूर्ति के लिए समाज अब अपने गांवों में कर्नल बैंसला और उनकी विचारधारा को आत्मसात कर रहा है। उन्होंने कहा- यह पुस्तकालय हमारे बच्चों के लिए दो तरह से काम करेगा। एक तो यह यहां के स्थानीय बच्चों के लिए अध्ययन स्थल का कार्य करेगा। दूसरा, कर्नल बैंसला की स्मृति और संदेशों को यहां स्थानीय तौर पर हमेशा के लिए संजोकर रख लिया है। अभी भी समाज को बहुत लंबी दूरी तय करनी है और इस तरह के निर्माण से समाज को एक आध्यात्मिक ताकत मिलती है। अब पीछे मत हटिए, छा जाइये और छाए रहिये वहीं कर्नल बैंसला की मूर्ति अनावरण के एक अन्य कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की महिलाओं ने हमेशा आंदोलनकारीयो का कंधे से कंधे मिलाकर सहयोग किया है। यहां की महिलाओं की बहादुरी के चर्चे आंदोलन के दौरान अखबारों के माध्यम से देश-विदेश तक पहुंचे हैं। सुबह-शाम भोजन बनाकर आंदोलनकारी के लिए खाने कि व्यवस्था करना। आंदोलन के दौरान सड़कों पर उतरना और बिना डरे गिरफ्तारी देना। हमारी महिलाओं की हिम्मत मेहनत और नीयत का जीवंत परिचय है। उस वक्त आंदोलन में महिला शक्ति ने जिस तरह से भाग लिया, हिम्मत दिखाई उसे समय-समय पर में याद करना चाहिए कि हमारी आधी आबादी शक्ति और शौर्य से भरी हुई है। उन्होंने कहा- कर्नल साहब कहते थे, “मेरी बेटियाँ किसी से कम नहीं, बल्कि ये जन्मजात योद्धा है” इसलिए अब पीछे मत हटिए, छा जाइये और छाए रहिये।


