आरएनटी मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में खरीदारी में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। यह मामला साल 2022 से 2025 के बीच हृदय रोगियों के लिए खरीदे गए पेसमेकर और स्टेंट से जुड़ा है। आरोप है कि इस तीन वर्ष की अवधि में इन जीवनरक्षक उपकरणों की खरीद बिना नियमित निविदा प्रक्रिया अपनाए की गई। इसके लिए 10 करोड़ खर्च किए, जबकि, उपकरणों की कीमत 5 करोड़ ही थी। जानकारी के अनुसार, हॉस्पिटल प्रशासन ने पेसमेकर की खरीद के लिए दो बार औपचारिक रूप से टेंडर प्रक्रिया तो शुरू की, लेकिन हर बार तकनीकी खामियों का हवाला देते हुए निविदाएं निरस्त कर दी गईं। पहले 28 फरवरी 2024 को टेंडर संख्या-37 जारी किया गया। इसमें पांच फर्मों ने आवेदन किया, पर इसे निरस्त कर दिया गया। इसके बाद 16 नवंबर 2024 को टेंडर संख्या-57 निकाला गया। इसमें चार फर्मों ने भाग लिया। लेकिन, इसे भी तकनीकी कमियों के आधार पर रद्द कर दिया गया। आखिरी में 5 मई 25 को टेंडर संख्या-6 जारी कर बोस्टन साइंटिफिक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को स्वीकृत कर दिया। 2022 से दिसंबर 2025 के बीच 3600 स्टेंट बिना टेंडर के खरीदे गए। इन पर 8 करोड़ 50 लाख खर्च हुए। हर स्टेंट की कीमत 23 हजार 625 रुपए रही। यदि इन्हें निविदा से खरीदते तो आधी कीमत यानी साढ़े चार करोड़ में यह खरीद संभव थी। 180 पेसमेकर व 3600 स्टेंट की खरीद में गड़बड़ी इस बीच, 2022 से 2025 तक करीब 180 पेसमेकर बिना टेंडर के खरीदे गए। इनपर 2 करोड़ 17 लाख 80 हजार खर्च किए। प्रति पेसमेकर की कीमत 1 लाख 21 हजार चुकाई गई। यदि समय रहते निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली जाती तो यही पेसमेकर 1 लाख 6 हजार रुपए प्रति यूनिट की दर से खरीदे जा सकते थे। इससे सरकार को करीब 27 लाख रुपए की बचत हो सकती थी। खरीद के लिए स्टेट हेल्थ इंश्योरेंस की प्रक्रिया को बनाया आधार: स्टेंट की बिना टेंडर के खरीद के लिए राजस्थान स्टेट हेल्थ इंश्योरेंस एजेंसी की प्रक्रिया को आधार बनाया गया। ताकि, खरीद की प्रक्रिया पर सवाल न उठे। यह खरीद मैसर्स एसके सोल से की गई। इसके बाद तीन सदस्यीय समिति गठित कर एस इंडिया कार्डियोपैथी और राधे नामक फर्म से भी स्टेंट खरीदे गए। “आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. विपिन माथुर का कहना है कि शिकायत के आधार पर डायरेक्टोरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन द्वारा पूरे मामले की जांच की जा चुकी है। इसमें किसी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता नहीं पाई गई।”


