भरतपुर की आयुर्वेद रसायनशाला में अब 190 प्रकार की दवाओं का निर्माण होगा। अभी तक 11 प्रकार की दवाओं का निर्माण होता था। निर्माण की जिम्मेदारी ग्वालियर की एक निजी फार्मेसी को सौंपी गई है, जिसे रसायनशाला हैंडओवर की जाएगी। इसलिए नवंबर माह से दवाओं का उत्पादन बंद है। हैंडओवर करने की तैयारी प्रारंभ हो गई है। पुरानी मशीनों को दूसरी रसायनशालाओं में भेजा जाएगा। इसके अलावा संजीवनी, शंखनाभि, फिटकरी, सुहागा, गोदंती आदि की 29 हजार किलो सामग्री को भी मुख्यालय के निर्देश पर दूसरी रसायनशालाओं में भेजा जाएगा। आयुर्वेद विभाग ने ग्वालियर की दीनदयाल फार्मेसी से एमओयू किया है, जो भरतपुर के अलावा अजमेर में भी दवाओं का निर्माण करेगी। यहां निर्माण कार्य ऑटोमेटिक मशीनों से होगा। दवाइयों का उत्पादन और पैकिंग पूरी तरह नई तकनीक से होगा। करीब 15 करोड़ रुपए की लागत से लगाई जा रही मशीनें जुलाई तक काम करना शुरू करेंगी। विभाग का मानना है कि दवाइयां ज्यादा तेजी से बनाई जाएंगी। ज्ञात रहे कि अभी तक रसायनशाला में दवाइयां व पैकिंग मैनुअली होती रही है। भरतपुर की रसायनशाला में अभी गोदंती भस्म, बाल सुधा भस्म, शंख भस्म, कपर्द भस्म, शुभ्रा भस्म, शुक्ति भस्म, संजीवनी बटी, घृताशय पिष्टी, जात्यादि तैल, मुस्तकादि क्वाथ, मधुकादि हिम का निर्माण होता था, जिसकी सप्लाई भरतपुर संभाग सहित 10 जिलों में थी। अब एजेंसी यहां अत्याधुनिक तकनीक की नई मशीनें लगाने जा रही है। पूरे प्रदेश में होगी आपूर्ति, स्टाफ बढ़ेगा, पुरानी मशीनें जोधपुर जाएंगी भरतपुर की रसायनशाला में भस्म, पिष्टी, मंडूर, छार, परपटी, तेल, पंचकर्म उत्पाद, पेस्ट बनाए जाएंगे। जिन्हें पूरे प्रदेश में सप्लाई किया जाएगा। इसलिए यहां स्टाफ बढ़ेगा और ट्रांसपोर्टेशन का भी काम बढ़ जाएगा। यहां लगी पुरानी मशीनों को जोधपुर, उदयपुर व केलवाड़ा की रसायनशालाओं में भेजा जाएगा। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में पांच रसायनशालाएं भरतपुर, उदयपुर, अजमेर, जोधपुर व केलवाड़ा में हैं। भरतपुर की रसायनशाला से दस जिलों—भरतपुर सहित धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, कोटा, बारां, बूंदी, झालावाड़, दौसा, अलवर—में करीब एक हजार सेंटरों पर दवाइयों की सप्लाई होती है। “भरतपुर व अजमेर पीपीपी मोड पर रसायनशाला का संचालन होगा। ग्वालियर की दीनदयाल फार्मेसी करीब 190 प्रकार की दवाओं का उत्पादन एवं पैकिंग करेगी। हैंडओवर करने की कार्रवाई प्रारंभ हो गई है। स्थानीय स्तर पर होने वाला उत्पादन नवंबर से बंद है।”
-वैद्य उमेश गोहदन, प्रभारी रसायनशाला


