मध्यप्रदेश में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वैध अनुमति के बिना संचालित 5961 औद्योगिक इकाइयों के मामले में हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्वत: संज्ञान लिया है। कोर्ट ने इस विषय को अत्यंत गंभीर मानते हुए जनहित याचिका दर्ज की है। सोमवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने निर्देश दिए कि शासन का जवाब कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायमित्र को सौंपा जाए, जो उसका परीक्षण कर अपनी रिपोर्ट हाई कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मामला जल एवं वायु प्रदूषण कानूनों के उल्लंघन से जुड़ा है। इसलिए मुख्य सचिव सभी संबंधित विभागों (आवास एवं पर्यावरण विभाग, उद्योग विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) के साथ समन्वय कर तत्काल प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें।
दरअसल, एक रिपोर्ट के आधार पर हाई कोर्ट ने यह स्वत: संज्ञान लिया था, जिसमें खुलासा हुआ कि प्रदेशभर में हजारों उद्योग बिना आवश्यक सहमति के संचालित हो रहे हैं। इस पर कोर्ट ने सभी संबंधित विभागों को नोटिस जारी किए थे, लेकिन अब तक केवल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से ही जवाब प्रस्तुत किया गया। पोलोग्राउंड से कान्ह तक जा रहा जहरीला पानी पोलोग्राउंड क्षेत्र में स्थित कई छोटे-बड़े कारखाने जहरीला अपशिष्ट सीधे कान्ह नदी में छोड़ रहे हैं। प्रदूषण बोर्ड इन इकाइयों को नोटिस दे चुका है। बिजली कंपनी द्वारा कनेक्शन काटे जाने के बावजूद, ये कारखाने शपथ पत्र देकर और एसटीपी बनाने का आश्वासन देकर दोबारा चालू हो गए, लेकिन एसटीपी आज तक नहीं बने। नदी किनारे उगाई जा रही सब्जियों में भी इसी प्रदूषित पानी का उपयोग हो रहा है। रेड और ऑरेंज श्रेणी की इकाइयां भी नियमों से बाहर
रिपोर्ट में सामने आया है कि बड़ी संख्या में अस्पताल, क्लिनिक, खदानें और क्रशर जैसी इकाइयां रेड व ऑरेंज श्रेणी में आती हैं और इनकी सहमति अवधि समाप्त हो चुकी है। सत्यापन के दौरान कई इकाइयां बंद पाई गईं, जिससे बिना नवीनीकरण संचालित इकाइयों की संख्या घटकर 4877 रह गई। हालांकि, ऑनलाइन पोर्टल पर डेटा अपडेट की प्रक्रिया अभी जारी है।


