गोवर्धन परिक्रमा मार्ग से जुड़े पूंछरी का लौठा क्षेत्र के 4 हेक्टेयर में राधावन वाटिका बनाने का कार्य पिछले 2 महीने से चल रहा है, जिसकी दीवार निर्माण करने के नाम पर 21 व 22 जनवरी 2026 को पीलू के पेड़ों की कटाई कर दी, जिस मामले में आरक्षित वन भूमि पर कथित निर्माण गतिविधियों व पेड़ों की कटाई की शिकायत राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में करने पर प्रशासन हरकत में आ गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में लंबित वाद O.A. 24/2016 व टीटीजेड-2016 प्रावधानों के संदर्भ में वन विभाग ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है, वहीं एनजीटी ने जिला कलेक्टर डीग से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। सीएम भजनलाल शर्मा ने अपने जन्मदिवस पर 15 दिसंबर 2024 को डीग में पूंछरी का लौठा व गोवर्धन परिक्रमा विकास परियोजना का शिलान्यास किया था। उसकी के तहत सीएम ने गिरिराजजी की परिक्रमा में 1.2 किमी का राजस्थान में पड़ने वाला हिस्सा परिक्रमा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया था। गिरिराज जी परिक्रमा पथ के विकास को 4 जोन में बांट विकसित करने की योजना बनाई थी, जिसके तहत ही राधा वाटिका बनाने की घोषणा की गई थी। उसकी के तहत 95 लाख की लागत से राधावन वाटिका को विकसित किया जा रहा था। वाटिका में पाथवे, गजीबो हट व बाउंड्री वॉल बननी थी, जिसके तहत दीवार 260 मीटर दीवार बननी थी, लेकिन वन विभाग के कर्मिकों के मौके पर होने के बावजूद ठेकेदार ने दीवार सीधी बनाने के चक्कर में पीलू के पेड़ काट दिए। मोती कुंड के पीलू पेड़: ब्रज की धरोहर और कृष्ण-राधा प्रेम कथा का प्रतीक ब्रज की कला और संस्कृति के जानकार ज्योतिषाचार्य रामभरोसी भारद्वाज ने बताया कि पीलू ब्रज की प्राचीन वनस्पतियों में से है और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी है। गर्ग संहिता में भी इसका उल्लेख है। मान्यता है कि इंद्र के प्रकोप से बचाने के बाद कृष्ण और राधा की सगाई हुई। राधा के पिता वृषभानु ने नंद बाबा को कीमती मोती दिए, जिसे कृष्ण ने मोती कुंड के पास मिट्टी में बो दिया। बाद में वहीं पेड़ उगे और उन पर मोती जैसे फल/पीलू लगने लगे। किवदंती है कि राधाजी इन पीलू के पेड़ों की छाया में ही कृष्ण से मिलने आती थीं। इसलिए ब्रज 84 कोस सहित प्राचीन नगरों में पीलू के पेड़ बहुतायत में पाए जाते थे। आज भी इन पेड़ों को ब्रज की सांस्कृतिक धरोहर माना जाता है और श्रद्धालु इन्हें कृष्ण-राधा की प्रेम कथा से जुड़ा प्रतीक मानकर सम्मान देते हैं। एसीएफ सुरेश को बनाया जांच अधिकारी तीन दिन में रिकॉर्ड पेश करने के आदेश जिला कलक्टर के आदेश पर डीएफओ प्रमोद धाकड़ ने परिक्रमा मार्ग के राजस्थान हिस्से के करीब 1.2 किमी क्षेत्र में जेसीबी से निर्माण कार्य और बिना अनुमति पेड़ों की कटाई की जा रही है। इन आरोपों की जांच के लिए सहायक वन संरक्षक को प्रारंभिक जांच अधिकारी नियुक्त कर तीन दिन में रिकॉर्ड सहित रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। इधर, रेंजर रामकरण मीणा ने वनपाल/ वनरक्षक द्वारा पूरे मामले में जानकारी न देने पर दोनों से ही स्पष्टीकरण मांगा था। “पूंछरी के लौठा में पेड़ काटने के मामले में एनजीटी में शिकायत हुई है,लेकिन एनजीटी से कोई नोटिस हमको नहीं मिला है। हम मामले की जांच कर रहे हैं। जांच के बाद ही कुछ कह सकते हैं।”
-प्रमोद धाकड़, डीएफओ ( वन विभाग)


