महाशिवरात्रि पर साल में एक बार रायसेन किले पर स्थित प्राचीन सोमेश्वर महादेव मंदिर के गर्भगृह के ताले 12 घंटे के लिए खोले जाएंगे। सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश कर भगवान शिव के दर्शन का अवसर मिलेगा। इस दौरान 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। महाशिवरात्रि मेला 15 फरवरी से शुरू होगा। इस दौरान किले की पहाड़ी तक वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। केवल प्रशासनिक व्यवस्था में लगे वाहनों को ही ऊपर जाने की अनुमति होगी। श्रद्धालु तीन निर्धारित मार्गों से पैदल ही मंदिर तक पहुंच सकेंगे। टांका और पहाड़ी के अन्य खड़ी व फिसलन भरे परंपरागत रास्तों से चढ़ाई पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। सुबह 6 बजे से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो जाता है, लेकिन दोपहर 12 से 4 बजे के बीच सबसे लंबी कतारें लगती हैं। शाम 4 बजे के बाद शीघ्र दर्शन की व्यवस्था की जाती है और 6 बजे गर्भगृह में पुनः ताला लगा दिया जाता है। इसके बाद समिति सदस्य और कुछ स्थानीय लोग रात्रि जागरण के लिए रुकते हैं, जहां रातभर भजन-कीर्तन होता है। पहला मार्ग शहर की पुरानी बस्ती नरापुरा से सीढ़ियों के जरिए है, जिसका उपयोग मुख्यतः स्थानीय लोग करते हैं। दूसरा और सबसे प्रमुख मार्ग भोपाल रोड के चोपड़ा क्षेत्र से प्राचीन बावड़ी के सामने स्थित सीढ़ियों वाला रास्ता है, यहीं से सबसे अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं। बावड़ी के आसपास पार्किंग की व्यवस्था रहेगी। तीसरा मार्ग चोपड़ा शमशान घाट के पास से सड़क मार्ग है। महाशिवरात्रि के दिन यहां वाहन प्रतिबंधित रहेंगे, लेकिन जो सीढ़ियां नहीं चढ़ सकते, वे इस रास्ते से पैदल मंदिर तक पहुंच सकेंगे। इसी मार्ग पर स्थित प्राचीन शिव गुफा मंदिर के भी दर्शन होंगे। किले तक पहुंचने के तीन तय मार्ग मेले की तैयारी को लेकर विभागों को जिम्मेदारियां सौंपी मेले को लेकर सभी विभागों को जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं। निर्धारित मार्गों के अलावा अन्य सभी रास्तों से किले पर चढ़ाई पूरी तरह बंद रहेगी। इसके लिए एक बार फिर किले पर जाकर दुर्गम और खतरनाक रास्तों की स्थिति का अवलोकन किया जाएगा। श्रद्धालुओं से अपील है कि वे केवल तय किए गए मार्गों से ही किले पर पहुंचें। – मनीष शर्मा, एसडीएम रायसेन


