सीहोर में एक्मे पेपर लिमिटेड कंपनी की कार्रवाई से प्रजापति और कुशवाहा समाज के परिवारों घर हटाने और काम बंद होने से परेशान है। करबला पुल के पास सीवन नदी के किनारे पिछले 50 सालों से रह रहे इन परिवारों को कंपनी द्वारा बेदखल किए जाने का खतरा मंडरा रहा है। अब कंपनी ने एक दर्जन हथियारबंद गार्ड तैनात कर मजदूरों का रास्ता रोक दिया। इससे न केवल उनकी दैनिक जरूरतों की आपूर्ति रुक गई है, बल्कि ईट निर्माण के लिए आवश्यक कच्चे माल भी नहीं ला पा रहे। ऐसे में, भट्ठों में लगभग 12 लाख कच्ची ईंटें फंसी हुई हैं, जिनका निर्माण कार्य अधूरा रह गया है। स्थानीय प्रशासन ने भी इन परिवारों को जमीन से खाली करने के नोटिस जारी कर दिए हैं। प्रशासन की ओर से 20 से ज्यादा कच्चे मकानों को तोड़ने की चेतावनी भी दी गई है। प्रभावित परिवारों ने जनसुनवाई में अपनी व्यथा रखी है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। मजदूर परिवारों की मांग है कि या तो बेदखली की कार्रवाई तत्काल रोकी जाए या फिर उन्हें वैकल्पिक जमीन और एक्मे पेपर लिमिटेड कंपनी से उचित मुआवजा दिया जाए। इसलिए हटा रहे कई सालों पहले फैक्ट्री बंद हो चुकी है और उसकी जमीन पर अनेक लोग सालों से ईट बनाकर व्यवसाय कर रहे हैं लेकिन अब फैक्ट्री में प्रशासन को आवेदन दिया है कि उनकी जमीन पर अतिक्रमण है जिसे हटाया जाए।


