भास्कर न्यूज | नोवामुंडी मुर्गा महादेव मंदिर काफी पुराना है। इसके पहले 1960 के दशक में झोपड़ी के नीचे बाबा स्थापित थे। बाद में धीरे-धीरे मंदिर का विस्तार किया गया। उस दौरान वहां की एक महिला पुजारी हुआ करती थी। मंदिर निर्माण कार्य खत्म होने के बाद पुजारी बदलते गए। समय के परिवर्तन के साथ मंदिर का स्वरूप बदल दिया गया जिससे भक्तों के लिए और अधिक आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। महादेवनशा स्थित मंदिर भी काफी पुराना है। कई सालों तक खुले आसमान के नीचे पूजा- अर्चना होती थी।फिर मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हुआ। कई साल तक अधूरे मंदिर में पूजा- अर्चना होती थी। 15 फरवरी को होने वाले महाशिवरात्रि को लेकर मंदिर के चारों ओर साफ- सफाई शुरू कर दी गई है। मंदिर कमेटी द्वारा झरने की सफाई भी पहले से कर दी गई है।प्रतिदिन शिवलिंग पर पूजे जाने वाले बेलपत्ता आदि की सफाई भी की गई है।पिछले एक सप्ताह से मंदिर के रंगरोगन कार्य भी लगभग खत्म हो चुका है। महाशिवरात्रि को लेकर मंदिर अहाते में जागरण कार्यक्रम रखा गया है।भक्तों के मनोरंजन के लिए भजन,कीर्तन के अलावा दिन के लिए सत्यनारायण पाला का आयोजन किया जाता है।शिव रात्री को लेकर दुकानदार पूजा सामग्री पहले से लाकर रख दिए हैं। महाशिवरात्रि में विशेष उत्सव मनाने के लिए ओिडशा बॉर्डर के नालदा, बड़ीता, दुधबिला, वैतरणी के रामतीर्थ आदि शिव मंदिर में तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। ^झारखंड राज्य सीमावर्ती क्षेत्र के पड़ोसी राज्य स्थित मुर्गा महादेव मंदिर अपने आप में काफी प्राचीनतम मंदिर है। मंदिर आस्था का केंद्र बने रहने के कारण दूर-दराज के श्रद्धालु प्रतिदिन आकर शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं। प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि की रात को हजारों की संख्या में शिवभक्त बाबा से आशीर्वाद लेने मंदिर पहुंचते हैं। यहां दर्शन के बाद अधिकतर शिवभक्त महादेवशाल मंदिर जाते हैं। बीरो नायक,समिति उपाध्यक्ष,मुर्गा महादेव मंदिर।


