बारां में सोमवार को गौसेवकों पर हुए लाठीचार्ज के बाद देर शाम कोटा से आईजी राजेंद्र गोयल बारां पहुंचे। उन्होंने कोतवाली थाने में विधायक और भाजपा पदाधिकारियों की मौजूदगी में गौसेवकों व हिंदू संगठनों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल की सभी मांगें मान ली गईं और पुलिस हिरासत में लिए गए सभी 9 गौसेवकों को देर रात रिहा कर दिया गया। यह घटना 6 फरवरी को एक बछड़े का कटा हुआ धड़ मिलने के बाद शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा थी। गौसेवकों और हिंदू संगठनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। रविवार तक भी पुलिस द्वारा मामले का खुलासा न होने पर सोमवार को संगठनों ने शहर में रैली निकाली और बाजार बंद करवाया। प्रदर्शनकारी प्रताप चौक पुलिस चौकी के सामने धरने पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। मौके पर पहुंचे एडीएम और एसडीएम ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन गौसेवक कलेक्टर को बुलाकर ज्ञापन सौंपने और कोतवाली सीआई को हटाने की मांग पर अड़े रहे। दोपहर करीब 3 बजे अचानक पुलिस ने लाठियां भांजनी शुरू कर दी, जिससे मौके पर भगदड़ मच गई। कुछ पथराव होने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी दागे। देर शाम आईजी राजेंद्र गोयल ने बारां पहुंचकर स्थिति की समीक्षा की। इसके बाद विधायक राधेश्याम बैरवा की मौजूदगी में कोतवाली थाने में प्रतिनिधिमंडल से बातचीत हुई। प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर और एसपी को विभिन्न मांगों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। विधायक राधेश्याम बैरवा ने बताया कि मामले के सभी बिंदुओं पर सहमति बन गई है। इसमें मामले की निष्पक्ष जांच, गौशाला के लिए भूमि आवंटन, डंपिंग यार्ड को शहर से बाहर स्थानांतरित करना और गौ एम्बुलेंस के लिए विधायक कोष से 10 लाख रुपए स्वीकृत करना शामिल है। साथ ही, सोमवार को हिरासत में लिए गए सभी 9 लोगों को छोड़ दिया गया है। यह है पूरा मामला
शहर के नारेड़ा रोड पर 6 फरवरी को एक बछड़े का कटा हुआ घड़ मिला था। इसके बाद गौसेवकों और हिंदू संगठनों ने मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की थी। जांच के बाद पुलिस ने श्वानों द्वारा गोवंश की ऐसी हालत करने की बात कही थी। इस पर गौसेवक और हिंदू संगठनों ने जांच सवाल उठाते हुए असहमति जताई और सोमवार को बारां बंद काआह्वान किया था।


