राजस्थान के स्कूल शिक्षा विभाग ने साल 2026 की जिला एकेडमिक रैंकिंग जारी कर दी है। इस फेहरिस्त में शेखावाटी के झुंझुनूं जिले ने एक बार फिर अपनी धाक जमाते हुए प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल किया है। हालांकि, यह उपलब्धि जितनी गौरवशाली नजर आ रही है, उससे कहीं अधिक सवाल इसके ‘स्कोर कार्ड’ पर खड़े हो रहे हैं। शीर्ष पर झुंझुनूं, पर जीत का स्वाद कुछ ‘फीका’
शिक्षा विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, झुंझुनूं जिला पूरे प्रदेश में नंबर-1 पायदान पर रहा है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि 100 अंकों के कुल मूल्यांकन में से प्रदेश के इस टॉपर जिले को महज 34 अंक प्राप्त हुए हैं। यह आंकड़ा शिक्षा जगत के विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बन गया है कि जब राज्य का सर्वश्रेष्ठ जिला ही 35% का आंकड़ा पार नहीं कर पाया, तो शेष राजस्थान में जमीनी हकीकत क्या होगी। रैंकिंग की स्थिति: एक नजर में जनवरी 2026 की इस रैंकिंग में टॉप-3 पर पड़ोसी जिलों का ही दबदबा रहा है। चूरू जिले ने इस बार अपनी कार्यप्रणाली में बेहतरीन सुधार करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया है, जबकि बांसवाड़ा और जैसलमेर जैसे जिले रैंकिंग में सबसे निचले पायदान पर संघर्ष कर रहे हैं। कठोर मानक या कमजोर प्रदर्शन जिला शिक्षा अधिकारी राजेश मील बताया कि विभाग ने इस वर्ष Learning Outcomes (सीखने के प्रतिफल) को निर्णायक महत्व दिया है। रैंकिंग कम होने के पीछे मुख्य रूप से सख्त मूल्यांकन मानक माने जा रहे हैं। DEO मील ने बताया और अधिक बेहतर करने की गुंजाइश है। नंबर तो कम ही है, इस बार और बेहतर करेंगे। हम पूरे राजस्थान में अव्वल है।
ग्राउंड मॉनिटरिंग: अधिकारियों द्वारा फील्ड विजिट और औचक निरीक्षण को प्राथमिकता दी गई। उपस्थिति और गवर्नेंस: छात्रों की नियमित उपस्थिति के साथ-साथ स्कूल संचालन की जवाबदेही को भी स्कोर का आधार बनाया गया। डेटा-आधारित समीक्षा से सुधरेगी सूरत शिक्षा विभाग अब इसे एक ‘वेक-अप कॉल’ की तरह देख रहा है। विभाग के अनुसार, हर महीने होने वाली इस रैंकिंग का उद्देश्य जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा करना है। सीएसई सचिव की अध्यक्षता में होने वाली नियमित बैठकों में अब उन कमजोर कड़ियों की पहचान की जाएगी, जिनके कारण स्कोर इतना कम रहा है।


