अफसरों से प्रताड़ित हेड कॉन्स्टेबल के आखिरी शब्द…:पुलिस को इतना भी मत बेचो कि सही आदमी नौकरी नहीं कर पाए

डीजीपी सर से निवेदन है कि पुलिस को इतना भी मत बेचो कि सही आदमी नौकरी नहीं कर पाए। नीमच जिले में सब कुछ बिक रहा है। कोई सुनने को तैयार नहीं है। थाने में पीसीआर 1, पीसीआर 2, लाइन का रोजनामचा, जिम, खेल सब पैसों में बिक रहे हैं। ये बातें नीमच पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल होशियार सिंह के सुसाइड नोट का हिस्सा है। अपने सुसाइड नोट में होशियार सिंह ने अपने ही विभाग के अधिकारियों पर प्रताड़ना, भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगाए हैं। होशियार सिंह की मौत ने पूरे पुलिस महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इस सुसाइड नोट ने सिस्टम की उस खामी को उजागर किया है जहां ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की कोई कीमत नहीं है। हालांकि पुलिस के आला अधिकारी इस सुसाइड नोट में लिखी बातों को सिरे से खारिज करते हैं। होशियार सिंह की मौत के बाद परिवार उनके शव को लेकर हरियाणा रवाना हो गया। होशियार सिंह ने सुसाइड नोट में जो बातें लिखीं क्या वाकई में ऐसा हो रहा है ये जानने के लिए भास्कर ने नीमच पुलिस लाइन के पुलिसकर्मियों से बात की। कोई सामने नहीं आया, लेकिन दबी जुबां में हर किसी ने होशियार सिंह के आरोपों पर मुहर लगा दी। परिवार ने तो खुलकर अफसरों पर पैसा लेकर ड्यूटी लगाने के आरोप लगाए। पढ़िए रिपोर्ट… बेटी बोली- पापा कमजोर नहीं थे
अपने पिता को याद करते हुए होशियार सिंह की बेटी अर्पिता यादव बताती हैं कि पापा के चार-चार ऑपरेशन हो गए थे। वह अफसरों से गुहार लगाते थे कि उनकी हार्ड ड्यूटी न लगाएं, लगाना हो तो नाइट ड्यूटी लगा दें या थाने पर भेज दें। मगर, अधिकारी (आरआई और अन्य) उन्हें कई-कई दिनों के लिए मुलजिम पेशी पर दूसरे राज्यों में भेज देते थे। मेरे पापा कमजोर नहीं थे और न ही हार मानने वालों में से थे। वह घर से खाना खाकर सही सलामत निकले थे। कंट्रोल रूम पर ही कुछ ऐसा हुआ कि उन्होंने इतना बड़ा कदम उठा लिया और वह लाश बन गए। अर्पिता की आंखों में अपने पिता को खोने का गम और सिस्टम के खिलाफ गुस्सा साफ दिखाई देता है। अर्पिता बताती हैं कि उनके पिता पिछले चार दिनों से छुट्टी पर थे और सोमवार को उन्हें ड्यूटी ज्वाइन करनी थी। रविवार को वह अपनी छुट्टी बढ़वाने के लिए ही घर से निकले थे। परिवार के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर उन्हें छुट्टी के लिए अपने लाइन ऑफिसर, यानी आरआई से मिलना था, तो वह पुलिस कंट्रोल रूम क्यों गए? परिवार को शक- कंट्रोल रूम में कुछ हुआ
अर्पिता का आरोप है कि कंट्रोल रूम में जरूर कुछ हुआ है। वहां ऐसा क्या हुआ कि मेरे पिता को जहर खाने पर मजबूर होना पड़ा? यह एक बड़ा सवाल है, जिसका जवाब जांच में सामने आना चाहिए।कंट्रोल रूम में सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं। फुटेज की जांच होनी चाहिए कि पापा कब पहुंचे, वहां किन लोगों से मिले और कब उन्होंने जहर खाया। परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि होशियार सिंह का मोबाइल फोन गायब कर दिया गया है। अर्पिता कहती हैं, पापा का मोबाइल उनके पास ही था, जो हमें नहीं दिया गया। मोबाइल गायब कर दिया गया है। चार पन्नों का सुसाइड नोट भ्रष्टाचार की पूरी ‘रेट लिस्ट’ होशियार सिंह ने अपनी मौत से पहले चार पन्नों का एक पत्र डीजीपी, आईजी, डीआईजी और एसपी को संबोधित करते हुए लिखा है। यह पत्र उन तक पहुंचा या नहीं, यह साफ नहीं है, लेकिन इसके कुछ हिस्से अब सार्वजनिक हो चुके हैं और वे बेहद गंभीर हैं। पुलिसकर्मी बोले- पैसे देने पर मिलती है आराम की ड्यूटी
होशियार सिंह के आरोपों में कितनी सच्चाई है, यह जानने के लिए जब भास्कर ने पुलिस लाइन के कुछ अन्य कर्मचारियों से बात की, तो नाम न छापने की शर्त पर जो बातें सामने आईं, वे सुसाइड नोट के हर शब्द पर मुहर लगाती हैं। एक जवान ने बताया, ‘यह कोई नई बात नहीं है। यहां सब जानते हैं कि पैसे देने पर मनमुताबिक ड्यूटी लग जाती है।’ वह बोला- कई ड्यूटी तो ‘कमाई वाली’ होती हैं, जैसे पीसीआर या वाहन चेकिंग। इन जगहों पर ड्यूटी लगवाने के लिए जवानों से 500 से 2000 रुपए तक लिए जाते हैं। एक अन्य कर्मचारी ने बताया, कई जवान बाहर के हैं। अगर उनके घर की तरफ कोई डाक जानी है या कोई पेशी है, तो वे वहां की ड्यूटी लगवाना पसंद करते हैं। इसके लिए अलग से पेमेंट देना पड़ता है। जो पैसे नहीं देता, उसे जानबूझकर परेशान किया जाता है, हार्ड ड्यूटी पर भेजा जाता है।” यहां तक कि रोलकॉल (हाजिरी) से छूट पाने के लिए भी पैसे देने पड़ते हैं। अधिकारी बोले- आरोप गलत, होशियार सिंह खुद था दागी
जब इन आरोपों के बारे में आरआई विक्रम सिंह भदौरिया से बात की गई, तो उन्होंने इन्हें सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना था, प्रदेश की किसी भी लाइन में कोई कर्मचारी एचसीएम (हेड कांस्टेबल मोहर्रिर) से खुश नहीं रहता। होशियार सिंह की बात करें तो उसे गंभीर शिकायतों में सजाएं मिल चुकी हैं, एक बार तो वह बर्खास्त भी हुआ है। स्टाफ कम है, इसलिए ड्यूटी लगाना हमारी मजबूरी है। ऐसा नहीं है कि किसी की कठिन और किसी की आराम वाली ड्यूटी लगाते हैं। पैसे लेकर ड्यूटी लगाने के आरोप पर उन्होंने कहा, यह गलत है। होशियार मेरे पास आया था कि उसकी बाहर ड्यूटी न लगाएं, जिसके बाद से हम उससे नाइट ड्यूटी ही करा रहे थे। वहीं, नीमच के एसपी अंकित जायसवाल ने मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, सुसाइड नोट में जो आरोप लगाए गए हैं, उनकी बारीकी से जांच की जाएगी। पुलिस लाइन की ड्यूटी जहां से चलता है भ्रष्टाचार का खेल
पुलिस लाइन किसी भी जिले की पुलिस का बैकबोन होती है, जहां से रिजर्व बल को विभिन्न ड्यूटियों पर भेजा जाता है। होशियार सिंह के आरोपों को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि यहां से कौन-कौन सी ड्यूटियां लगती हैं। आरोप हैं कि इसी सिस्टम में “आरामदायक” और “कमाई वाली” ड्यूटियों को पैसों के दम पर बेचा जाता है, जबकि जो पैसे नहीं देते, उन्हें जानबूझकर “हार्ड” और थकाऊ ड्यूटियों पर भेजा जाता है। ये खबर भी पढ़ें… जहर खाकर कंट्रोल रूम पहुंचा पुलिसकर्मी, लिखा-सब बिक रहे हैं नीमच में हेड कॉन्स्टेबल होशियार सिंह (50) ने जहर खाकर खुदकुशी कर ली। वे कनावटी पुलिस लाइन में तैनात थे। डीजीपी, डीआईजी और एसपी के नाम लिखे तीन पेज के सुसाइड नोट में उन्होंने विभागीय भ्रष्टाचार के साथ पुलिस लाइन के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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