फेमस हास्य कवि केशर देव की सड़क हादसे में मौत:रात 2 बजे शादी समारोह से लौट रहे थे, झपकी आने से ट्रक में घुसी कार

सीकर में सड़क हादसे में हास्य कवि केशर देव मारवाड़ी (केसरीमल) की मौत हो गई। वे शादी समारोह में शामिल होकर पत्नी के साथ जयपुर लौट रहे थे, झपकी लगने से कार सड़क किनारे खड़े ट्रक में घुस गई। हादसे में कार के आगे का हिस्सा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। घटना रींगस में RSWM तिराहे पर सोमवार रात करीब 2 बजे हुई। हादसे में पत्नी चंदा देवी को हल्की चोट आई। जिनका जयपुर के कांवटिया अस्पताल में इलाज करवाया गया, वह अब स्वस्थ हैं। लाडनूं के रहने वाले थे, झोटवाड़ा सरकारी स्कूल में टीचर थे रींगस एसआई दिलीप सिंह ने बताया-हास्य कवि केशर देव मारवाड़ी (केसरीमल) (59) लाडनूं के रहने वाले थे। वे वर्तमान में जयपुर के मुरलीपुरा में रह रहे थे। झोटवाड़ा स्थित एक सरकारी स्कूल में टीचर थे। सोमवार को वे अपनी पत्नी चंदा देवी (55) के साथ चूरू के रतनगढ़ में शादी समारोह में शामिल होने गए थे। वहां से लौटते समय रींगस में उन्हें झपकी आ गई। जिससे उनकी कार सड़क किनारे खड़े ट्रक से टकरा गई। हादसे में कवि केशर देव मारवाड़ी (केसरीमल) की मौके पर मौत हो गई। कार का आगे का हिस्सा क्षतिग्रस्त हादसे में कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के बाद आसपास के लोगों ने एंबुलेंस को सूचना दी और उन्हें रींगस के राजकीय उपजिला हॉस्पिटल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने उनको मृत घोषित कर दिया। रात में शव को मॉर्च्युरी में रखवा दिया। सुबह पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने कार और ट्रक को कब्जे में लेकर थाने में खड़ा करवा दिया है।
दोनों बेटियों की शादी हो चुकी कवि केशर देव मारवाड़ी (केसरीमल) के बड़े भाई बेगाराम प्रजापत ने बताया-केशर देव मारवाड़ी की दो बेटियां दिव्या (28) व भव्या (25) हैं। दोनों की शादी हो चुकी है। केशर देव मारवाड़ी छह भाइयों में तीसरे नंबर पर थे। उनके आकस्मिक निधन से साहित्य जगत और शिक्षा क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। ‘मारवाड़ रत्न’ और ‘मारवाड़ का गौरव की मिली थी उपाधि केशर देव मारवाड़ी इंडिया लाफ्टर चैंपियन (सोनी टीवी), लाफ इंडिया लाफ (लाइफ ओके), हंसने का मुखिया कौन (स्टार वन) जैसे टीवी कार्यक्रमों में हिस्सा ले चुके थे। उन्होंने मुकेश अंबानी के पारिवारिक कार्यक्रमों में भी प्रस्तुति दे चुके थे।
मारवाड़ी संस्कृति और भाषा को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए राजस्थान की विभिन्न संस्थाओं द्वारा ‘मारवाड़ रत्न’ और ‘मारवाड़ का गौरव’ जैसी मानद उपाधियों से सम्मानित थे।
शिक्षा विभाग में कार्यरत रहने के कारण उन्हें शिक्षण और सांस्कृतिक गतिविधियों में योगदान के लिए स्थानीय और जिला स्तर पर सम्मानित किया गया था।

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