कोटा में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा- मॉनिटरिंग नहीं होने से घटिया काम होते हैं। जिले में 1100 स्कूलों की मॉनिटरिंग का जिम्मा सिर्फ 3 अफसरों पर है। इससे स्कूल के भवन जल्द जर्जर हो जाते हैं। कई वर्षों से ऐसा ही चल रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि काम में किसी तरह की लापरवाही न हो। अगले बारिश के सीजन में स्कूलों की छतें न टपकें, सीपेज (दीवारों से रिसाव) की समस्या न हो। कोटा में अपने आवास पर मंगलवार को पीडब्ल्यूडी, समसा और प्रशासन से जुडे़ अधिकारियों की मीटिंग ली। मीटिंग मुख्य रूप से जर्जर स्कूलों के मरम्मत को लेकर ली गई थी। जिले के सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों के रिपेयरिंग के लिए मंत्री ने अफसरों को निर्देश दिए। जिले में 1100 स्कूल, देखरेख का जिम्मा 3 अफसरों के भरोसे
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने बताया- कोटा जिले में करीब 1100 स्कूल हैं, लेकिन उनके भवनों में देखरेख का जिम्मा एक एईएन और दो जेईएन के भरोसे है। स्कूलों में जो काम हों, उनकी मॉनिटरिंग ठीक तरह से होनी चाहिए, लेकिन स्टाफ नहीं होने की वजह से उनकी मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही है। मंत्री हीरालाल नागर ने बताया- आपदा राहत के तहत स्कूलों में रिपेयरिंग के लिए दो-दो लाख रुपए आए हैं। पहले बारिश और कई पुराने स्कूल भवन होने से बिल्डिंग जर्जर हो चुके हैं। कई स्कूलों में दीवारों में रिसाव की समस्या है। इनकी मरम्मत के लिए जो राशि आई है, उससे काम सही तरीके से और गुणवत्तापूर्ण हों, इसके लिए अधिकारियों से चर्चा कर निर्देश दिए गए। स्कूलों को समसा की जगह पीडब्ल्यूडी काे दें
मंत्री हीरालाल नागर ने बताया- इस बारे में मुख्य सचिव से भी चर्चा की है कि या तो कैडर बनाए जाए या फिर स्कूलों को समसा की जगह पीडब्ल्यूडी को दे दिए जाए। ताकि इसकी सुव्यवस्थित तरीके से मॉनिटरिंग हो सके। नागर ने कहा- स्कूलों में हमारे देश का भविष्य जाता है। पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। ऐसे में इन हादसों से बच्चों और उनके घरवालों के मन में डर का माहौल रहता है। उसे दूर करना और सुरक्षा देना हमारा काम है।


