झालावाड़ में जनजातीय उप योजना के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। बाड़िया गोर्धनपुरा गांव में 14 फरवरी को भील समुदाय के 86 किसानों और महिलाओं के लिए खाद्य प्रसंस्करण पर आधारित उद्यमिता विकास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के प्रभारी और प्रसार शिक्षा वैज्ञानिक डॉ. मोहम्मद यूनुस ने भील समुदाय को खाद्य प्रसंस्करण के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण के माध्यम से आय बढ़ाई जा सकती है। कार्यक्रम में महिलाओं को पोषण वाटिका विकसित करने के लिए 11 प्रकार की सब्जियों के बीज वाले किचन गार्डन किट वितरित किए गए। केंद्र की गृह वैज्ञानिक डॉ. तुलिका आचार्य ने फल-सब्जी, दलहन और तिलहन फसलों में खाद्य प्रसंस्करण की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने महिलाओं को स्वयं सहायता समूह बनाकर उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। लावासल ग्राम पंचायत के सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी ने भी कार्यक्रम में भाग लिया और कृषि विज्ञान केंद्र के साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया। विशेषज्ञों ने महिलाओं को घर पर पोषण वाटिका विकसित करने का सुझाव दिया, जिससे वे सालभर पौष्टिक सब्जियों का उपभोग कर सकें। साथ ही पपीता, नींबू, संतरा और अमरूद जैसे पोषक तत्वों से भरपूर फलदार वृक्षों को लगाने पर भी जोर दिया गया।


