BDK डिलीवरी मामले में डॉक्टर निर्दोष करार:कलेक्टर के आदेश पर बनी टीम ने जांच रिपोर्ट सौंपी; ऑपरेशन बीच में छोड़ने का था आरोप

झुंझुनूं के राजकीय भगवानदास खेतान अस्पताल में प्रसव में लापरवाही के मामले में कलेक्टर के निर्देश पर गठित चिकित्सकों की टीम ने जांच कर पीएमओ को रिपोर्ट सौंप दी। प्रारंभिक जांच में इसमें डॉक्टर की लापरवाही नहीं मानी गई है। दरअसल 13 दिसंबर की रात को प्रसव के लिए राजकीय बीडीके अस्पताल की जनाना विंग में भर्ती कराई गई शहर के मोतीसिंह की ढाणी निवासी अनिता देवी की डिलीवरी डॉ. आकांक्षा ने करवाई थी। परिजनों ने डॉ. आकांक्षा सैनी पर लापरवाही का आरोप लगाया था। परिजनों का कहना था कि डॉक्टर आकांक्षा ने एक बच्चे का प्रसव करा दिया, लेकिन जुड़वां बच्चे होने के कारण दूसरे बच्चे का प्रसव कराने से इनकार कर दिया और उन्हें जबरन दूसरे अस्पताल में ले जाने की बात कहकर बाहर निकाल दिया। इस मामले को कलेक्टर रामावतार मीणा ने गंभीरता से लिया। उन्होंने पीएमओ डॉ. राजवीर राव को जांच कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद पीएमओ डॉ. राव ने तीन विशेषज्ञ चिकित्सकों सर्जन डॉ. रामस्वरूप पायल, गायनोलॉजिस्ट डॉ. मनीषा चौधरी व मेडिकल ज्यूरिस्ट डॉ. संजय ऐचरा की कमेटी गठित की थी। टीम ने डॉ. आकांक्षा सैनी व ड्यूटी पर कार्यरत नर्सिंग स्टाफ के बयान दर्ज किए। जांच में सामने आया कि एक बच्चा नॉर्मल हो गया था। दूसरे बच्चे की धड़कन नहीं होने पर ऑपरेशन की आवश्यकता बताई। परिजनों की ओर से यहां ऑपरेशन न कराकर स्वेच्छा से मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाने के बारे में लिखकर वहां से ले जाना माना गया। इस टीम ने जांच के बाद पीएमओ को अपनी रिपोर्ट सौंपी। पीएमओ ने यह रिपोर्ट कलेक्टर व चिकित्सा एवं स्वास्थ्य निदेशक को भेजी है।

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