कारम डैम घोटाले के लिए पांच इंजीनियर जिम्मेदार पाए गए हैं, जबकि तीन इंजीनियरों को साक्ष्यों के अभाव में आरोपों से मुक्त किया गया है। जल संसाधन विभाग के सचिव जॉन किंग्सली एआर की 350 पेज की जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। 304.44 करोड़ की लागत वाले कारम डैम घोटाले की साढ़े तीन साल तक चली जांच के बाद पेश की गई रिपोर्ट में जिन पांच इंजीनियरों को डैम फूटने के लिए जिम्मेदार पाया गया है, उनके विरुद्ध जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता द्वारा 17 फरवरी को सुनवाई की जाएगी। इस डैम को बनाने की जिम्मेदारी एएनएस कंसट्रक्शन नई दिल्ली को सौंपी गई थी। जल संसाधन विभाग के सचिव जॉन किंग्सली एआर की रिपोर्ट में कहा है कि विभागीय जांच के अंतर्गत उपलब्ध साक्ष्यों, साक्षियों के बयान, आरोपियों द्वारा पेश बचाव के दस्तावेज और अन्य तथ्यों के परीक्षण के बाद यह बात सामने आई है कि प्रभारी मुख्य अभियंता नर्मदा ताप्ती कछार सीएस घटोले, पी जोशी तत्कालीन अधीक्षण यंत्री जल संसाधन मंडल धार, बीएल निनामा तत्कालीन कार्यपालन यंत्री जल संसाधन संभाग एक धार, विकार अहमद सिद्दीकी तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी जल संसाधन उपसंभाग धामनोद और विजय कुमार जत्थाप तत्कालीन उपयंत्री जल संसाधन उपसंभाग धामनोद पर कारम डैम फूटने को लेकर लगाए गए आरोप प्रमाणित पाए गए हैं। इसके अलावा राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव तत्कालीन उपयंत्री जल संसाधन उपसंभाग धामनोद को विभागीय जांच से मुक्त किया गया है। साथ ही अशोक कुमार राम तत्कालीन उपयंत्री जल संसाधन उपसंभाग धामनोद और आरोप साबित नहीं हो पाए वहीं दशवंता सिसोदिया तत्कालीन उपयंत्री जल संसाधन उपसंभाग धामनोद पर भी आरोप प्रमाणित नहीं पाए गए। इसलिए तीन इंजीनियरों को जांच से मुक्त किया गया है। जांच अधिकारी ने यह भी टिप्पणी की
जांच अधिकारी जॉन किंग्सली एआर ने कहा है कि विभागीय जांच के दौरान कुछ आरोपी इंजीनियरों ने रिपोर्ट दी कि बांध पूरी तरह सुरक्षित था। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा बांध में कट लगाने का निर्णय लिया गया, अगर ऐसा नहीं किया जाता तो बांध भी सुरक्षित रहता। इस कार्य से शासन को कोई वित्तीय हानि नहीं हुई है। जांच अधिकारी ने इसके आधार पर शासन को हुई वित्तीय हानि का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में कहा है कि कलेक्टर धार के 3 फरवरी 2026 के पत्र के अनुसार कारम डैम दुर्घटना में किसानों और प्रभावित व्यक्तियों को हुए नुकसान के बाद कुल 14 लाख 70 हजार 398 रुपए का भुगतान सरकार को करना पड़ा है। इसमें से 1 लाख 94 हजार 419 रुपए खेती की जमीन पर मिट्टी के जमाव के कारण देने पड़े हैं तो 9 लाख 90 हजार 679 रुपए फसल क्षति के रूप में भुगतान करना पड़ा है। इसके अलावा ईंट भट्टों को हुए नुकसान पर 2 लाख 30 हजार और मकानों को हुए नुकसान पर 1 लाख 15 हजार 300 रुपए का भुगतान किया गया है। इससे साफ है कि शासन को वित्तीय हानि उठानी पड़ी है। जांच अधिकारी ने यह टिप्पणी भी की है कि केंद्रीय जल आयोग के निर्देशन में काम करने के बाद भी दो साल तक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसके चलते आयोग को बार बार पत्र लिखकर रिमाइंडर देना पड़ा है। डैम फूटना गैर जिम्मेदाराना कृत्य
रिपोर्ट में कहा गया है कि बारिश के दौरान निर्माणाधीन मध्यम श्रेणी के बांध का क्षतिग्रस्त होना कोई सामान्य घटना नहीं है। इसे मात्र अतिवृष्टि से उत्पन्न प्राकृतिक घटना के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। करीब 45 एमसीएम क्षमता के बांध के निर्माण कार्य में नाला क्लोजर का निर्णय लेकर बारिश में कार्य को अपूर्ण बनाए रखना अत्यंत लापरवाही और गैर जिम्मेदाराना कृत्य है। ऐसा करके मानवसृजित आपदा को आमंत्रण देने का काम किया गया है। यह पूरी तरह एवायडेबल स्थिति थी जिसे सक्षण और विवेकपूर्ण फैसले से रोका जा सकता था। आरोपी इंजीनियरों द्वारा यह तर्क देना कि कोई जनहानि नहीं हुई, उनके कदाचरण को कम नहीं करता है। इसके लिए मुख्य रूप से सीएस घटोल, पी जोशी, बीएल निनामा, विकार अहमद सिद्दीकी और विजय कुमार जत्थाप जिम्मेदार हैं क्योंकि बांध निर्माण की विषम परिस्थितियों के बाद भी इन अधिकारियों ने आवश्यक कार्यवाही के लिए नोटिस तक जारी नहीं किए। इस कारण फूटा डैम
अगस्त 2022 में निर्माणाधीन कारम बांध के क्षतिग्रस्त होने का मुख्य कारण यह पाया गया कि नाला बंधान के लिए जो काम होना था उसे पूरा किए बगैर और पर्याप्त और वैकल्पिक जल निकासी व्यवस्था किए बिना ही नाला क्लोजर किया गया। इसके साथ आरोपियों द्वारा डाउनस्ट्रीम केसिंग और बोल्डर टो का निर्माण किए बिना ट्रंकेटेड सेक्शन में बांध निर्माण करना स्वीकार किया गया है। साथ ही बिना वाटरिंग कम्पैक्शन के लूज काली मिट्टी को यहां डंप किया गया। बांध के डाउन स्ट्रीम में मौजूद 18 गांवों की आबादी को जोखिम में डालते हुए 45 एमसीएम क्षमता के बांध में बिना समुचित तैयारी के अमानक और गुणवत्ताहीन नाला बांध कार्य को चालू रखा गया। इसके साथ ही एकमात्र निकासी व्यवस्था के रूप में 2000 मिमी व्यास के पाइप को ढक्कन लगाकर नट बोल्ट से बंद किया जाना अत्यंत ही गैर जिम्मेदाराना और असावधानी वाला काम रहा है। शिवराज के कार्यकाल में फूटा था डैम
यह डैम 13 अगस्त 2022 को पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में फूटा था। उस समय भी जल संसाधन विभाग के मंत्री तुलसी सिलावट ही थे। डैम फूटने की जानकारी सामने आने के बाद तबके मुख्यमंत्री चौहान ने सबसे पहले लोगों की जान बचाने पर फोकस किया था और मंत्री तथा अफसरों की टीम भेजकर बांध के पानी को गांवों में जाने के बजाय दूसरे ओर डायवर्ट कराने की कार्यवाही कराई थी। ये खबर भी पढ़ें…
भ्रष्टाचार का कारम डैम खेत के खेत बहा ले गया ऊपर जो आप फोटो देख रहे हैं ये ऋषिकेश में गंगा किनारे का कोई फोटो शूट नहीं है। ये वो जगह है, जहां पिछले साल तक खेतों में फसल लहलहाती थी। अब यहां मिट्टी की जगह चट्टानें और पत्थर हैं। ये वो ही जगह है, जहां आज के दिन हड़कंप मचा था। शिवराज भोपाल में तो कई आला मंत्री और अफसर यहां संकट से बचने के लिए पूजा-पाठ कर रहे थे। जी हां, ये कारम डैम वाला कोठिदा गांव है। आज 13 अगस्त है…कारम डैम की बरसी है।पूरी खबर पढ़ें


