देवरिया। बस्ती जनपद के परशुरामपुर थाने में तैनात सीनियर सब इंस्पेक्टर (SSI) अजय कुमार गोड़ का अंतिम संस्कार सोमवार देर रात बरहज स्थित सरयू नदी के घाट पर किया गया। उनके बड़े पुत्र अमित राज ने पिता को मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के दौरान घाट पर भारी संख्या में लोग मौजूद रहे। परिजनों के साथ-साथ ग्रामीणों की आंखें भी नम रहीं। सदर कोतवाली क्षेत्र के मुड़ाडीह गांव निवासी अजय कुमार गोड़ का शव रविवार शाम करीब पांच बजे अयोध्या की सरयू नदी में मिलने के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई थी। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद देर शाम जब शव गांव पहुंचा तो घर में कोहराम मच गया। महिलाओं के रोने-बिखलने से माहौल गमगीन हो उठा और पूरे गांव में मातम पसर गया। पहले देखें, 2 तस्वीरें… चार दिनों से लापता चल रहे दरोगा का शव मिलने की सूचना मिलते ही सैकड़ों ग्रामीण उनके घर पर जुट गए। पिता रामचंद्र गोड़, बड़े भाई दिलीप कुमार गोड़, पत्नी रंजीता गौड़, बेटे अमित राज और उत्कर्ष राज समेत परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल रहा। ग्रामीणों ने बताया कि अजय कुमार गोड़ स्वभाव से मिलनसार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी थे, यही वजह है कि उनकी अचानक मौत से पूरा क्षेत्र स्तब्ध है। बेटे की मौत से पिता के सूख गए आंसू अजय कुमार गोड़ की असमय मौत ने उनके पिता रामचंद्र गोड़ को भीतर तक झकझोर दिया है। परिजनों के अनुसार घटना की सूचना मिलते ही घर में चीख-पुकार मच गई, लेकिन पिता की आंखों से आंसू तक नहीं निकले। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय तक चुपचाप बैठे रहे और किसी से कुछ बोल नहीं पाए। पूरे गांव में शोक का माहौल है और लोग परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं।
पिता बोले- प्रशासन सिर्फ आश्नासन देता रहा मृतक के पिता रामचंद्र गोड़ ने पुलिस विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया कि 5 तारीख की शाम अजय ड्यूटी से निकले थे और 6 तारीख की सुबह बहू रंजीता देवी से उनके लापता होने की जानकारी मिली। आरोप है कि लगातार संपर्क करने के बावजूद पुलिस की ओर से केवल “खोजबीन जारी है” का ही आश्वासन मिलता रहा और कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। रामचंद्र गोड़ का कहना है कि उन्हें शुरू से ही किसी अनहोनी की आशंका थी, लेकिन समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।


