फर्जी जख्म प्रतिवेदन बनाकर झूठे मुकदमे में फंसाने के मामले में डीसी से की जांच की मांग

जयनगर | सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) जयनगर में फर्जी मोहर के साथ जख्मी जांच प्रतिवेदन जारी किए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में चिकित्सक डॉ. प्रमोद कुमार ने मंजीत सिंह का इलाज करने तथा उनके नाम से जख्मी जांच प्रतिवेदन जारी करने से इनकार किया है। वहीं कांड के अनुसंधानकर्ता जयनगर थाना के एएसआई संजय कुमार का कहना है कि मंजीत सिंह का जख्मी प्रतिवेदन डॉ. प्रमोद कुमार द्वारा लिखकर दिया गया था। उन्होंने बताया कि प्रतिवेदन लेते समय डॉक्टर ने एक पंजी में रिसीव के लिए हस्ताक्षर भी कराए थे। एएसआई संजय कुमार के अनुसार मारपीट के मामले में प्रारंभ में जयनगर थाना से मंजीत सिंह के इलाज के लिए कोई जख्मी प्रतिवेदन नहीं भेजा गया था। बाद में वरीय पुलिस पदाधिकारी के पर्यवेक्षण के दौरान निर्देश मिला कि मंजीत सिंह का जख्मी प्रतिवेदन केस डायरी में संलग्न किया जाए। इसके बाद सीएचसी जयनगर से प्रतिवेदन की मांग की गई, जिस पर डॉ. प्रमोद कुमार ने रिपोर्ट उपलब्ध कराई। उन्होंने यह भी बताया कि डॉक्टर को सूचित किया गया था कि इस प्रतिवेदन के आधार पर उन्हें न्यायालय में गवाही भी देनी पड़ सकती है, जिस पर डॉक्टर ने सहमति जताई थी। भास्कर न्यूज | कोडरमा जिले में कथित रूप से गलत तरीके से जख्म प्रतिवेदन तैयार कर लोगों को झूठे मुकदमे में फंसाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। जयनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत नावाडीह गांव निवासी रामप्रसाद पासवान ने उपायुक्त को आवेदन देकर आरोप लगाया है कि उनके गांव के कुछ लोगों द्वारा साजिश के तहत फर्जी जख्म प्रतिवेदन तैयार कराया गया, जिसके आधार पर उन्हें और अन्य लोगों को झूठे मुकदमे में फंसाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। आवेदन में उल्लेख है कि जिस व्यक्ति के नाम से जख्म रिपोर्ट बनाई गई, उसका न तो विधिवत इलाज हुआ और न ही संबंधित स्वास्थ्य केंद्र में उसका नाम पंजीकरण में दर्ज है। इसके बावजूद नियमों की अनदेखी कर जख्म प्रतिवेदन तैयार कर थाना में केस दर्ज कराया गया। पीड़ित का आरोप है कि पूरे प्रकरण में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया और प्रशासनिक प्रक्रिया का दुरुपयोग किया गया।पीड़ित पक्ष का कहना है कि झूठे मुकदमे और लगातार दबाव के कारण वे और उनका परिवार गंभीर मानसिक तनाव में हैं। इसको लेकर उन्होंने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराने की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषी लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो। मामले को लेकर सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि जख्म प्रतिवेदन से जुड़े आरोप गंभीर हैं। स्वास्थ्य विभाग स्तर पर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।इस मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और जख्म प्रतिवेदन की प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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