कागजों पर सिर्फ 71 अस्पताल, लेकिन हकीकत में 300 से ज्यादा अवैध क्लिनिक। यह आंकड़ा किसी तरक्की का नहीं, बल्कि बाड़मेर के ग्रामीण इलाकों में फैलते झोलाछाप अस्पतालों का है। भास्कर स्टिंग में जो तस्वीरें सामने आई हैं, वे रूह कंपाने वाली हैं क्योंकि बिना डिग्री के फर्जी डॉक्टर सरकारी अस्पताल के ठीक सामने चारपाई पर ड्रिप चढ़ा रहे हैं। हाल ये है कि बाड़मेर जिले में फर्जी डॉक्टरों ने गांवों के गली-मोहल्लों तक अवैध क्लिनिक खोल रखे हैं और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की जिंदगी से इलाज के नाम पर खिलवाड़ कर रहे हैं। प्रसूताओं की जांच से लेकर प्रसव तक अवैध क्लिनिक पर करवाए जा रहे हैं। भूणिया में पीएचसी के सामने मेडिकल स्टोर पर रोज सुबह होते ही मरीजों के लिए बेड लग जाते हैं। ऐसे ही हालात बामणोर सीएचसी की नवीन बिल्डिंग के सामने के है। यहां 100 मीटर में करीब 5-7 अवैध क्लिनिक हैं। बड़े अक्षरों में अस्पताल का नाम भी लिख रखा है। भूणिया, बामणोर सहित कई गांवों में मान्यता प्राप्त अस्पताल एक भी नहीं है। सेड़वा, बाखासर, सांता, चौैहटन, धनाऊ, रामसर, गडरारोड, गागरिया, शिव, गुड़ामालानी, धोरीमन्ना, तालसर सहित करीब 140 से ज्यादा गांवों में बड़े स्तर अवैध क्लिनिक संचालित हो रहे हैं। सरकारी अस्पताल के सामने ही अवैध क्लिनिक भास्कर टीम जब भूणिया पीएचसी पहुंची, तो यहां का नजारा सरकारी सिस्टम को चुनौती देने वाला था। एक तरफ सरकारी अस्पताल है, तो ठीक उसके सामने मेडिकल स्टोर के बाहर मरीजों के लिए चारपाइयां बिछी हुई थीं। बिना किसी डिग्री के धूल और मक्खियों के बीच मरीजों की रगों में सीधे ड्रिप उतारी जा रही थी। जबकि यहां से रोज स्वास्थ्य अधिकारी निकलते हैं। बाहर मेडिकल स्टोर, अंदर अस्पताल यह तस्वीर भूणिया की है, जहां बाहर तो मेडिकल स्टोर का नाम लिखा है, लेकिन अंदर पहुंचते हैं तो पीछे पूरा अस्पताल है। यहां खुलेआम फर्जी डॉक्टर मरीजों की जिंदगी से खेल रहे हैं। इसी तरह भूणिया में सोनू मेडिकल, गोदारा मेडिकल, चौधरी मेडिकल, श्रीराम मेडिकल, बालाजी लेबोरेट्री सहित कई अवैध क्लिनिक चला रहे है, यह सब मेडिकल स्टोर की आड़ में ही संचालित हो रहे हैं। बामणोर सीएचसी के सामने चल रहे कई अवैध अस्पताल यह तस्वीर बामणोर सीएचसी की नवीन बिल्डिंग के सामने की है। जहां 100 मीटर में करीब एक दर्जन अवैध क्लिनिक, अस्पताल है। खुलेआम मरीजों को बेड पर लिटाया हुआ है। यहां तक की कई मेडिकल स्टोर के साथ अस्पताल भी खोल रखे हैं। ओपीडी के साथ वार्ड भी बनाए हुए हैं और उनमें मरीज भर्ती हैं। भास्कर टीम जब शटर वाली दुकान में पहुंची तो अंदर दो मरीजों को ड्रिप चढ़ रही थी। यहां अस्पताल ही नहीं, अवैध लेबोरेट्री भी चल रही है। बाहर सीमेंट के दुकान का कलर है, लेकिन अंदर अस्पताल है। 71 अस्पताल ही मान्य भास्कर ने अस्पतालों को लेकर पड़ताल की तो सामने आया कि जिले में 71 अस्पताल ही मान्यता प्राप्त है। बाड़मेर शहर में 37, चौहटन में 7, गुड़ामालानी में 6, धनाऊ में 3, शिव में 2, धोरीमन्ना में 4, सेड़वा में 4, रामसर में 3, मांगता, नोखड़ा, सनावड़ा, गडरारोड में 1-1 अस्पताल हैं। ये अस्पताल कस्बों के आसपास खुले हैं। इनके अलावा विभाग के रिकार्ड में किसी को मान्यता प्राप्त नहीं है। अवैध क्लिनिकों के खिलाफ पीसीपीएनडीटी एक्ट और एनएमसी एक्ट में कार्यवाही और एफआईआर दर्ज करवाने का प्रावधान है। शहर में सिर्फ 6 लेबोरेट्री, गांवों में एक को भी नहीं बाड़मेर शहर में लक्की, हरि दयालु, महालक्ष्मी, उषा, महावीर व भारत 6 लेबोरेट्री को मान्यता दी गई है। इनके अलावा गांवों में कोई भी लेबोरट्री स्वास्थ्य विभाग से अधिकृत नहीं है। सिस्टम से ये 2 तीखे सवाल 1. सरकारी अस्पताल के सामने अवैध क्लिनिक चल रहे हैं, क्या विभाग को ये नजर नहीं आता?
2. बिना डिग्री के प्रसव करवा रहे हैं, अगर किसी जच्चा-बच्चा की जान गई तो जिम्मेदार कौन होगा? “कई बार अवैध क्लिनिकों के खिलाफ कार्रवाई कर सीज भी किए हैं। यह ड्रग इंस्पेक्टर और मूल विभाग का काम है। अब अभियान चलाकर कार्यवाही करेंगे।” -डॉ. विष्णुराम विश्नोई, सीएमएचओ, बाड़मेर।


