मंत्रालय में एसीएस की अध्यक्षता में हुई बैठक:नए कानूनों के तहत अब वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर होगी कार्रवाई

मप्र में अब अपराधों की जांच और न्याय प्रक्रिया पारंपरिक तौर-तरीकों से निकलकर पूरी तरह डिजिटल और वैज्ञानिक होने जा रही है। मंत्रालय में गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि राज्य की पुलिस नवीन आपराधिक कानूनों (बीएनएस, बीएनएसएस, बीएसए) के तहत तकनीकी साक्ष्य जुटाने के लिए पूरी तरह तैयार है। बैठक में भारत सरकार की संयुक्त सचिव (आंतरिक सुरक्षा) निष्ठा तिवारी ने भी क्रियान्वयन की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। नए कानूनों के तहत अब गंभीर अपराधों के घटनास्थलों पर फॉरेंसिक साक्ष्यों का संकलन अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए राज्य में फॉरेंसिक लैब की क्षमता बढ़ाने और जांच अधिकारियों को आधुनिक गैजेट्स से लैस करने पर चर्चा हुई। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के सहयोग से जांच प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जा रहा है, जिससे केस डायरी से लेकर साक्ष्यों की प्रस्तुति तक सब कुछ ऑनलाइन और पारदर्शी होगा। बैठक में बताया गया कि साइबर अपराध, मादक पदार्थ नियंत्रण व आतंकवाद निरोध जैसे मामलों में अब वैज्ञानिक साक्ष्य ही मुख्य आधार बनेंगे।

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