प्रदेश में लापता लोगों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2025 में 34,461 बड़े और 6778 बच्चे गुमशुदा हुए। इसमें चौंकाने वाली बात यह है कि बड़ों में 20111 (74%) महिलाएं और बच्चों में 5748 (84%) बच्चियां गायब हुईं। कुल 25,472 बड़ों और 6260 बच्चों को तलाश लिया गया। लापता 8,989 बड़ों में 6714 महिलाएं और 464 बच्चियां अब भी लापता है, जिन्हें तलाशा जा रहा है। किशोर आयु वर्ग में लड़कियों का अनुपात 70% से अधिक है। 12 से 18 आयु समूह में लगभग 78% तक गुमशुदा बच्चे लड़कियां हैं। पिछले तीन साल की तुलना करें तो हर साल लापता होने का आंकड़ा एक से डेढ़ हजार बढ़ा है। लड़कियां ही क्यों हो रहीं ज्यादा गायब?
क्राइम व चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट्स की पड़ताल में सामने आया है कि 12 से 18 आयु समूह की नाबालिग लड़कियों के गायब होने की एक बड़ी वजह सोशल मीडिया है। 1. सोशल मीडिया संपर्क
इंस्टाग्राम और फेसबुक पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर दोस्ती की जाती है। फिर भरोसा जीतकर घर छोड़ने या शादी का झांसा दिया जाता है। 2. पेरेंट्स सतर्क हों
ऑनलाइन दोस्त से बात करना और छिपाना। मोबाइल में नया नंबर या सोशल मीडिया अकाउंट मिलना। नौकरी, मॉडलिंग या फिल्मों में काम का ऑफर मिलना। नाबालिग लड़कियों के मामलों में खतरा ज्यादा
प्रदेश में गुमशुदा बच्चों में हर 10 में से 8 केस नाबालिग लड़कियों के हैं। नाबालिग लड़कियों में 518 अब भी लापता हैं। यह सिर्फ गुमशुदगी नहीं, बल्कि संभावित मानव तस्करी से जुड़ा जोखिम भी माना जाता है। नौकरी, मॉडलिंग या शादी का भरोसा दिलाते हैं
क्राइम व चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट्स के अनुसार सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल से संपर्क किया जाता है। नौकरी, मॉडलिंग या शादी का भरोसा दिलाया जाता है। बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों पर एजेंट नजर रखते हैं और ट्रांजिट के जरिए एक राज्य से दूसरे राज्य में शिफ्ट कर देते हैं।


