भास्कर न्यूज| टोंक भजनलाल शर्मा सरकार का तीसरा और बहुप्रतीक्षित बजट बुधवार को विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा। इस बजट से जिले को बड़ी उम्मीदें हैं, लेकिन उम्मीदों के साथ-साथ एक टीस भी है। टीस उन अधूरी घोषणाओं की, जो गहलोत सरकार से लेकर वर्तमान भाजपा सरकार के पिछले दो बजटों में की गईं, लेकिन आज भी वे केवल फाइलों में दफन हैं। टोंक की जनता अब ‘नया क्या मिलेगा’ से ज्यादा इस पर नजर टिकाए है कि ‘पुराना कब शुरू होगा’। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि ईसरदा बांध परियोजना पर काम चल रहा है। 275 करोड़ की बड़ी पेयजल योजना के लिए राज्य स्तर से स्वीकृति और फंड मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। टोंक शहर को नियमित जलापूर्ति हो सकेगी। मालपुरा उप जिला अस्पताल के लिए जमीन आवंटित है। बजट में फंड की घोषणा होते ही पीडब्ल्यूडी के माध्यम से निर्माण कार्य शुरू करवाया जाएगा। तहसील नोटिफिकेशन का मामला शासन स्तर पर लंबित है। टोंक की ऐतिहासिक पहचान अरबी-फारसी शोध संस्थान (एपीआरआई) में 3 करोड़ की लागत से म्यूजियम बनाने की घोषणा पूर्ववर्ती गहलोत सरकार ने की थी। सरकार बदली, भाजपा के दो बजट आए, लेकिन इस अंतरराष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट पर एक पत्थर तक नहीं लगा। टोंक की सांस्कृतिक धरोहर आज भी सरकारी उदासीनता का शिकार है। विस वार : उम्मीदों का रिपोर्ट कार्ड 1. टोंक: प्यासा शहर और 275 करोड़ की अटकी योजना टोंक विधानसभा के 11 शहरों के लिए 275 करोड़ की पेयजल योजना वर्ष 2025 में घोषित हुई थी। अगर यह धरातल पर आती, तो टोंक शहर की 2 लाख आबादी को रोजाना पानी मिलता, जो फिलहाल दो दिन में एक बार मिल रहा है। ईसरदा बांध से पानी लाने की 50 करोड़ की योजना भी कछुआ चाल से चल रही है। इसके अलावा, कचरा संग्रहण गाड़ियों की ‘रियल टाइम ट्रैकिंग’ की घोषणा केवल कागजी साबित हुई है। 2. मालपुरा-टोडारायसिंह: 80 साल पुराने जर्जर भवन में उप जिला अस्पताल मालपुरा में 150 बेड के उप जिला अस्पताल की घोषणा हुए डेढ़ साल बीत चुका है। कांकरा बालाजी के पास 4.29 हेक्टेयर जमीन भी आवंटित हो गई, लेकिन सरकार ने अब तक भवन निर्माण के लिए ‘बजट’ रिलीज नहीं किया। आज भी उप जिला अस्पताल 80 साल पुराने खंडहरनुमा भवन में चल रहा है, जहाँ मरीजों और स्टाफ की जान जोखिम में रहती है। 3. देवली-उनियारा: बनेठा मंडी और देवली पेयजल योजना ठंडे बस्ते में देवली के लिए 22 करोड़ की पेयजल योजना (5 टंकियां और फिल्टर प्लांट) स्वीकृत नहीं होने से रुकी हुई है। इससे जयपुर रोड की नई कॉलोनियों को पानी नहीं मिल पा रहा। वहीं, बनेठा में गौण कृषि मंडी के लिए जमीन आवंटन तो हो गया, लेकिन निर्माण बजट का इंतजार है। 4. निवाई: औद्योगिक विस्तार और प्यासे कंठ दत्तवास में नए औद्योगिक पार्क की घोषणा रीको का दबाव कम करने के लिए हुई थी, जो धरातल पर नजर नहीं आई। वहीं, निवाई और लाम्बाहरिसिंह के लिए 92 करोड़ की पेयजल योजनाएं भी एक साल से बजट आवंटन की बाट जोह रही हैं। चार घोषणाएं अब तक अधूरी . विधायक जनसुनवाई केंद्र: चारों विधानसभाओं में 10-10 लाख की लागत से ये केंद्र बनने थे, कहीं काम शुरू नहीं हुआ। . दत्तवास औद्योगिक पार्क: निवाई रीको का विस्तार रुका, स्थानीय युवाओं को रोजगार का इंतजार। . डिग्गी तहसील: घोषणा के बाद भी प्रशासनिक अमला मालपुरा से ही संचालित। . 92 करोड़ की पेयजल योजना: निवाई और लाम्बाहरिसिंह की 1.5 लाख आबादी को हाई प्रेशर पानी की दरकार।


