उज्जैन को इंदौर और जावरा को जोड़ने वाले दोनों ग्रीन फील्ड रोड का मसला अब तक नहीं सुलझा। उज्जैन-जावरा रोड प्रभावितों को जनवरी अंत तक जमीन व सड़क की स्थिति स्पष्ट करने का वादा भी अधूरा रह गया। इसी बीच उज्जैन-इंदौर ग्रीन फील्ड से प्रभावित किसानों ने 25 फरवरी से उज्जैन में धरने की चेतावनी दे डाली। इसमें प्रशासन के लिए सबसे दुविधा वाली बात यह हैं कि उज्जैन-इंदौर से दोनों जिले के प्रभावित सभी 28 गावों के किसान उज्जैन में ही धरना देंगे। वहीं उज्जैन-जावरा रोड से प्रभावित 62 गांव के किसान भी इनके समर्थन में उज्जैन जुटेंगे। यानी 90 गांवों के किसान धरने पर बैठने की तैयारी में है। इसको लेकर प्रभावित गांवों की मिलकर बनाई किसान संघर्ष समितियों ने तैयारी शुरू कर दी है। हर गांव में बैठक रखकर आंदोलन की रूपरेखा बना रहे है। स्थानीय अफसरों ने भी अब इस मामले को उच्च स्तर का मानते हुए निर्णय भोपाल के अफसरों का हवाला देते हुए हाथ खड़े करना शुरू कर दिए। किसानों की मांग है कि हाइवे नार्मल बनाए और बाजार मूल्य से जमीन का मुआवजा दिया जाए। उज्जैन-इंदौर ग्रीन फील्ड रोड से प्रभावित 28 गांवों के किसान उज्जैन में ही प्रदर्शन करेंगे। दोनों जिले की संयुक्त बैठक भी हो गई। किसानों ने 25 फरवरी से उज्जैन कलेक्टोरेट के पास अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने का निर्णय लिया है। उज्जैन-जावरा प्रभावितों ने भी इन्हें समर्थन देने का भरोसा दिलाया है। भोपाल घेरा तो डबल सर्वे, फिर भी निर्णय नहीं उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड हाईवे के विरोध में प्रभावित 62 गांवों के लोगों ने जनवरी में एमपीआरडीसी भोपाल का घेराव किया। उस समय अफसरों ने फिर से सर्वे करवाकर एक्सिस कंट्रोल की जरूरत परखने का भरोसा दिलाया। सर्वे होकर रिपोर्ट भी भोपाल पहुंच गई, लेकिन अफसर अब तक इसका निर्णय नहीं ले सके। अफसरों की लेतलाली को देख किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ऐसे में अब इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड प्रभावितों के साथ मिलकर संयुक्त रूप से आंदोलन शुरू हो गया तो अफसरों की मुश्किलें बढ़ जाएगी। शासन स्तर से ही होगा निर्णय ^उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड एक्सिस कंट्रोल रोड के मामले में फिर से ट्रैफिक सर्वे करवा लिया है। रिपोर्ट भी मुख्यालय भेज दी है। इस मामले में शासन स्तर से ही निर्णय लिया जाएगा। विजय सिंह, संभागीय प्रबंधक एमपीआरडीसी उज्जैन


