मास्टर प्लान…:प्रीमियम एफएआर की दरों में 7 माह बाद भी करेक्शन नहीं, 2 हजार करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट अटके

मास्टर प्लान में थोड़ी सी त्रुटि के कारण लगभग तीन साल से दो हजार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट अटके हुए हैं। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के अफसरों को जब इस गलती के संबंध में जानकारी दी गई तो उन्होंने संशोधन करने का नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया, लेकिन इसके 6 महीने बाद भी संशोधन नहीं हो पाया है। इसका असर शहर के विकास कार्य पर पड़ रहा है। पिछले तीन सालों में यहां एक भी बहुमंजिला इमारत की मंजूरी नहीं हो पाई है। इस कारण शासन को मिलने वाला राजस्व भी प्रभावित हो रहा है। नए मास्टर प्लान में प्रीमियम फ्लोर एरिया रेशो (एफएआर) की खरीदी की दर 0.05 के स्थान पर 0.50 दर्ज कर दी गई। इसका विरोध होने पर विभाग ने 19 जुलाई 2025 को दरों का संशोधन करने के लिए विज्ञापन जारी किया। इसमें एक महीने में आपत्ति मांगी गईं। विभागीय रिकार्ड के अनुसार इस मामले में एक भी आपत्ति नहीं आई और यह जानकारी भी मुख्यालय को भेज दी गई, लेकिन मास्टर प्लान में अभी तक संशोधन नहीं हो पाया है। क्या है मामला…: मास्टर प्लान 2035 का ड्राफ्ट 15 अक्टूबर 2021 को प्रस्तुत हुआ था। उसके अनुसार एफएआर खरीदने के लिए संबंधित क्षेत्र की कलेक्टर गाइड लाइन की दरों के हिसाब से 5% राशि जमा कराना थी। राजनीतिक अड़ंगों के चलते लगभग दो साल तक मास्टर प्लान भोपाल मुख्यालय में अटका रहा। कोर्ट के आदेश पर सरकार ने आनन फानन में 20 अप्रैल 2023 को मास्टर प्लान लागू कर दिया। लेकिन इसमें एफएआर खरीदी की दर 50% कर दी गई। खास बात यह है कि इंदौर में इसकी दर 5% ही है। प्रदेश के दूसरे महानगरों में यह व्यवस्था लागू नहीं है। क्या होता है फ्लोर एरिया रेशो: फ्लोर एरिया रेशो (एफएआर) का मतलब किसी भी साइज के प्लॉट पर निर्माण के लिए एक एरिया निर्धारित किया जाता है। ग्वालियर में प्रचलित एफएआर 1.25 है। इसका मतलब जमीन का सवा गुना निर्माण। यानि एक हजार वर्गफीट के प्लॉट पर दो मंजिलों तक अधिकतम निर्माण 1250 वर्गफीट ही किया जा सकता है। इसके लिए ग्राउंड फ्लोर पर आगे, पीछे और साइड की ओर कुछ एरिया खाली छोड़ना पड़ता है।
एफएआर ऑन परचेज योजना: एफएआर ऑन परचेज योजना के तहत बड़े निर्माण कार्य कराने वालों को सुविधा दी गई है कि यदि कोई बिल्डर यदि बड़े भूभाग पर इमारत का निर्माण करता है तो इसे मास्टर प्लान के अनुसार 1.25 एफएआर ही मिलेगा। लेकिन प्लॉट साइज के हिसाब से वह 3 तक एफएआर खरीद सकता है। इसके लिए उसे संबंधित क्षेत्र में प्रचलित कलेक्टर गाइड लाइन कर दरों की निर्धारित राशि जमा कराना होगी। भास्कर एक्सपर्ट – वीके शर्मा, पूर्व संयुक्त संचालक, नगर एवं ग्राम निवेश संशोधन में देरी का असर शहर विकास पर
मास्टर प्लान में प्रीमियम एफएआर खरीदी की दरों में गलती हुई थी, उसके संशोधन के लिए जुलाई में विज्ञापन का प्रकाशन करा दिया था। 30 दिन में आपत्तियां मांगी थीं, लेकिन इस मामले में कोई आपत्ति भी नहीं आई। ऐसे में सिर्फ असफसरों के रुचि न लेने के कारण मामला लंबित है। इसका असर शहर के विकास कार्यों पर पड़ रहा है। संशोधित दरों को शीघ्रता से लागू करने पर इसका लाभ शहर के बिल्डरों को तो मिलेगा ही साथ ही सरकार को भी करोड़ों रुपए का राजस्व प्राप्त होगा।

संशोधन के मामले में जल्द चर्चा करूंगा
मास्टर प्लान में संशोधन के मामले को लेकर मैं संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर समीक्षा करूंगा। साथ ही यह भी देखूंगा कि यह मामला किस स्तर पर लंबित है। इसे संशोधित कराने के प्रयास किए जाएंगे।
-तुलसीराम सिलावट, प्रभारी मंत्री, ग्वालियर ग्वालियर में ही लगाया अनोखा टैक्स
प्रदेश में ग्वालियर में अनोखा टैक्स लगाया है। इंदौर में इसकी दर 5%है, जबकि ग्वालियर में 50% कर दिया। चेंबर के प्रतिनिधि मंडल ने बिल्डरों के साथ अधिकारियों से मुलाकात की तो संशोधन का नोटीफिकेशन जारी हुआ, लेकिन संशोधन नहीं हुआ।
-दीपक अग्रवाल, मानसेवी सचिव, चेंबर ऑफ कॉमर्स

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