प्रयागराज में नाबालिग लड़कियों के ओवा एक्सट्रैक्शन यानी अंडाणु (एग्स) निकालकर बेचने के मामले में पुलिस का एक्शन लगातार जारी है। इस गंभीर मामले में अब पुलिस ने मां और बेटे को अरेस्ट किया है। मामले का खुलासा होने के बाद से मां–बेटे फरार थे। ये दोनों आरोपी गरीब, खासकर दलित नाबालिग लड़कियों, युवतियों को रुपये का लालच देकर अपने झांसे में लेते थे और उन्हें ओवा एक्सट्रैक्शन के लिए ले जाते थे। गांवों की गरीब लड़कियों को महंगे मोबाइल, रुपये और आगे नौकरी दिलाने का लालच देकर फंसाने के बाद इंदिरा आईवीएफ की महिला एजेंटों से मिला देते थे। इसके बाद इनके दस्तावेज तैयार करने के लिए गिरोह के अन्य सदस्य लग जाते थे। हर किसी का कमीशन तय होता था। मामले में पुलिस टीमों ने जांच के बाद अब रवि पुत्र जगमोहन को अरेस्ट किया है। पुराना फाफामऊ का रहने वाला रवि अपनी मां संगीता देवी के साथ पकड़ा गया है। इन मां बेटे पर आरोप है कि एजेंट के कहने पर मोटे कमीशन के लालच में ये लड़कियों को इस रैकेट के हवाल करते थे। फाफामऊ की रहने वाली नाबालिग लड़की से मुलाकात कर इन्हीं दोनों ने शुरुआत की थी। इसके बाद प्रिया को पलक नामक युवती से मिलाया था जो कि जेल जा चुकी है। पुलिस ने लंबी पूछताछ के बाद मां और बेटे के खिलाफ केस दर्ज किया है। इन दोनों ने कई लड़कियों को एजेंटों तक पहुंचाने की बात कबूल की है। इससे पहले इस गिरोह में शामिल चार महिलाओं और एक युवक को जेल भजा जा चुका है। चार महिलाएं और एक युवक गए जेल प्रयागराज में नाबालिग लड़कियों के ओवा एक्सट्रैक्शन यानी अंडाणु (एग्स) निकालकर बेचने के मामले में बड़ा एक्शन हुआ है। पुलिस ने रैकेट में शामिल 4 महिलाओं समेत 5 को हिसरात में लिया है। इसमें मां-बेटी, आईवीएफ की एजेंट, महिला और बेटा शामिल है। इन पर आरोप है कि इन्होंने एक नाबालिग लड़की को अपने जाल में फंसाया। उसे आईफोन और 10 हजार रुपए का लालच दिया। फिर उसे शादीशुदा बताकर IVF सेंटर ले गए। वहां नाबालिग के अंडाणु निकलवा दिए। लड़की की मां ने 6 फरवरी को इसकी शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने पीड़ित की पड़ोसी रिंकी, उसकी बेटी पलक उर्फ जोया, सीमा भारती, हिमांशु भारती और कल्पना भारती को पकड़की पूछताछ शुरू की। इससे पहले जांच में पूरे रैकेट के पीछे एक मुस्लिम महिला की साजिश भी सामने आई थी। पुलिस उसे ट्रेस करते हुए 3 एंगल पर जांच कर रही है। पहला- कितनी नाबालिग लड़कियों का ऑपरेशन कर इस तरह से अंडाणु निकाले गए। दूसरा- इसके पीछे क्या सेक्स रैकेट एक्टिव है? तीसरा- क्या इससे धर्मांतरण का रैकेट भी चलाया जा रहा है? पूरा मामला फाफामऊ थाना क्षेत्र का है। पहले पूरे मामले को समझ लेते हैं… पूरे मामले की शुरुआत प्रयागराज के नवाबगंज से होती है। यहां के मंसूराबाद की रहने वाली शालिनी (बदला हुआ नाम) के पति की 5 साल पहले मौत हो गई थी। शालिनी अब अपने 3 बेटियों के साथ रहती है। इसमें सबसे बड़ी बेटी 15 साल की, जबकि सबसे छोटा बेटा अनुज 5 साल का है। मां का कहना है- मैं किराये पर कमर लेकर रहती हूं। परिवार चलाने के लिए घरों में काम करती हूं। मेरे पास वाले कमरे में मुस्लिम परिवार रहता है। जहां रिंकी और उसकी बेटी पलक उर्फ जोया रहती हैं। मैं दिनभर बाहर रहती हूं। ऐसे में मेरे बच्चे उन्हीं के पास खेलते रहते हैं। बेटी अक्सर पलक के साथ बाहर जाती रहती थी। वो सुबह निकल जाती थी, फिर शाम को ही लौटकर आती थी। मुझे शक हुआ तो सवाल पूछे। मगर बेटी टालमटोल कर देती, कभी कुछ साफ नहीं बताती थी। 15 जनवरी को बेटी अचानक लापता हो गई। हम लोगों ने उसे फोन किया तो मोबाइल भी बंद था। बेटी को हर जगह ढूंढा, मगर कुछ पता नहीं चला। थाने में जाकर कोमल की तस्वीर के साथ एक शिकायत भी सौंपी। फिर 21 जनवरी को पता चला कि वह सिविल लाइंस के एक IVF सेंटर में एडमिट है। मैं वहां पहुंची, बहुत मुश्किल से मुझे मिलने दिया गया। वहां पता चला कि मेरी बेटी का तो ऑपरेशन हो चुका है। उसके अंडाणु निकाले गए थे, ताकि किसी दूसरी महिला के बच्चा हो सके। शालिनी की शिकायत पर पुलिस ने जांच शुरू की। पुलिस ने जब लड़की से सवाल पूछे- तो उसने जोया को मददगार बताया। चूंकि, कोमल की उम्र 15 साल थी, इसलिए मामला प्रयागराज के बाल कल्याण समिति (CWC) के पास भेजा गया। CWC के अध्यक्ष अखिलेश मिश्र ने लड़की और मां को बुलाया। दोनों के बयान दर्ज कराए। मामला गंभीर देख लड़की को शाहगंज थाने में बने वन स्टाप सेंटर (शेल्टर होम) में रखा गया है। अध्यक्ष के आदेश के बाद विशेष किशोर पुलिस ईकाई ने ऑन कैमरा लड़की का बयान दर्ज किया। 6 फरवरी को महिला ने पुलिस के पास नई तहरीर दी। पड़ोसियों पर बेटी को ब्रेनवॉश करने का आरोप लगाया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। अब जानिए गिरफ्तारी कैसे हुई… डीसीपी गंगा नंगर कुलदीप गुणावत ने बताया- शालिनी की शिकायत के बाद पुलिस ने रिंकी और पलक को हिरासत में लिया। पूछताछ में उन्होंने बताया कि वो लड़की को सीमा भारती (पत्नी दिलीप भारती) के पास लेकर गई थीं। सीमा ने अपने बेटे हिमांशु के जरिए पीड़िता का फर्जी आधार कार्ड बनवाया। फर्जी दस्तावेजों में नाबालिग को बालिग और विवाहित दिखाया गया। इसके बाद सीमा, पीड़िता को कल्पना भारती के पास लेकर गई। कल्पना IVF की रजिस्टर्ड एजेंट है। कल्पना ने फर्जी आधार के आधार पर फर्जी कंसेंट एफिडेविट (Consent Affidavit) तैयार कराया। इसके बाद उसी फर्जी आधार कार्ड और फर्जी कंसेंट के जरिए IVF सेंटर में नाबालिग का ओवा एक्सट्रैक्शन कराया गया। इन सभी तथ्यों के आधार पर पुलिस ने पलक, रिंकी, सीमा, हिमांशु, कल्पना और एक अन्य आरोपी को हिरासत में ले लिया है। 30 से 35 हजार रुपए तक कमीशन डीसीपी कुलदीप सिंह गुणावत ने बताया- पुलिस जांच में सामने आया कि एक ग्राहक के लिए तकरीबन 30 से 35 हजार रुपए तक का कमीशन दिया जाता है। कमीशन के चक्कर में ही गोरखधंधा चल रहा था। इसमें और भी लोगों की भूमिका सामने आ सकती है। आईवीएफ सेंटर के अन्य एजेंट के अलावा और लोगों की भूमिका की भी पुलिस जांच कर रही है। सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जेल भेजा जाएगा। कितनी लड़कियां रैकेट में फंसी, जांच हो रही बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के अध्यक्ष अखिलेश कुमार मिश्र ने कहा- चाइल्ड लाइन के जरिए लड़की के बारे में सूचना मिली। लड़की को शेल्टर होम में रखा गया है। इतना क्लियर है कि लड़की का ब्रेन वॉश करके अंडाणु निकालने का ऑपरेशन किया गया है। लड़की के बयानों में इस्लाम अपनाने के लिए प्रेरित करने की बात भी सामने आई है। ऐसी कितनी लड़कियां रैकेट में फंसी है, हम जांच करवा रहे हैं। अब किराये की कोख को लेकर भारत में लागू नियम-कानून भी जानिए… —————- ये भी पढ़ें- गाजियाबाद सुसाइड- खिड़की से 3 बहनें साथ गिर नहीं सकतीं:पुलिस ने 5 घंटे फ्लैट में बिताए, पिता की दूसरी शादी का एक झूठ पकड़ा गाजियाबाद में 3 बहनों की मौत की असली वजह तक पहुंचने के लिए पुलिस ने फ्लैट नंबर 907 में 5 घंटे बिताए। जिस पूजा के कमरे से तीनों बच्चियों ने छलांग लगाई थी, उसकी खिड़की खोलकर प्लास्टिक का स्टूल रखा गया। यह देखा गया कि क्या दो या तीन बच्चियां एक साथ इस खिड़की के अंदर खड़ी हो सकती हैं? 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