रायगढ़, सारंगढ़-बिलाईगढ़, जांजगीर-चांपा और सक्ती जिलों के 2.38 लाख कामगारों और उनके परिजन की सुविधा के नाम पर परसदा (खरसिया रोड) में 100 बिस्तरों का ईएसआईसी अस्पताल तो बना, लेकिन इलाज तक पहुंचने का रास्ता ही बंद है। अस्पताल की ओपीडी में औसतन 4 मरीज आते हैं। जिन्हें देखने के लिए 8 डॉक्टर नियुक्त हैं। इसकी दो वजह हैं, पहली अस्पताल के लिए जो जगह चुनी गई वह रायगढ़ से 12.5 किमी दूर है। यह जगह नियमित बस रूट पर नहीं है। यहां लोगों का पहुंचना मुश्किल या खर्चीला है। दूसरी वजह- अस्पताल में जरूरत जितना पानी उपलब्ध नहीं है। इससे मरीजों की भर्ती शुरू नहीं की जा सकी है। ऐसे में दो साल पहले शुरू हुए अस्पताल का लोगों को कोई फायदा नहीं है। अस्पताल की ओपीडी में जनवरी में 109, दिसंबर-25 में 98 और नवंबर-25 में 114 मरीज ओपीडी में परामर्श के लिए पहुंचे। केंद्रीय श्रम मंत्रालय की पहल पर रायगढ़-खरसिया मार्ग पर परसदा में इस अस्पताल की घोषणा की गई थी। 2018 में 11 एकड़ जमीन पर भूमिपूजन के बाद सितंबर 2019 में निर्माण शुरू हुआ, फिर कोरोना से देर हुई। 2022 में पूरा होने वाला अस्पताल अब तक अधूरा है। वैसे जरूरी इंतजाम कर फरवरी 2024 में ओपीडी शुरू कर दी गई। अस्पताल में पदस्थ सिविल विभाग के जूनियर इंजीनियर हरगोविंद ने बताया कि शुरुआत में लागत 74 करोड़ रुपए थी, जो बढ़कर 84 हुई और अब 94 करोड़ रुपए हो गई है। 30 बेड शुरू करना है, लेकिन ओटी ही हैंडओवर नहीं की गई रायगढ़ के परसदा स्थिति शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर वाला अस्पताल। यहां डॉक्टरों के 38 पद हैं। इनमें 18 विशेषज्ञ हैं, पर अभी सिर्फ 8 एमबीबीएस ही पदस्थ किए गए हैं। आईपीडी शुरू नहीं हुई, इसलिए विशेषज्ञों की पोस्टिंग भी नहीं की गई है।
प्रभारी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. निरोज कुजूर बताते हैं कि लगातार शहरी क्षेत्रों में कैम्प लगाए जा रहे ताकि मरीजों की पहुंच बढ़े। अस्पताल में मरीजों की कमी की वजह वे पहुंच में दिक्कत को मानते हैं। उन्होंने बताया कि जल्द ही 30 बेड शुरू किए जाएंगे। हमारे पास थोड़ा पानी है, बाकी टैंकर से मंगा लेंगे। दूसरी दिक्कत यह है कि सीपीडब्ल्यूडी ने अब तक ओटी हैंडओवर नहीं की है। ऑक्सीजन पाइपलाइन, जरूरी उपकरण, फर्नीचर नहीं लगे हैं। रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी विभाग भी शुरू करेंगे, इसके लिए जरूरी हुआ तो निजी विशेषज्ञों से सहायता ली जाएगी। 1.89 लाख लीटर पानी रोज चाहिए, मिलता है सिर्फ 68 हजार लीटर
काम की शुरुआत में ही सीपीडब्ल्यूडी ने पानी की किल्लत की बात कही थी। यहां 6 बोर कराए गए, दो फेल हुए, बचे चार में भी पर्याप्त पानी नहीं मिलता। 100 बिस्तरों के अस्पताल के लिए 1.89 लाख लीटर पानी रोज चाहिए, पर उपलब्ध सिर्फ 68 हजार लीटर है। इससे निर्माण की गति भी धीमी रही। पाइपलाइन से पानी लाने के लिए रायगढ़ नगर निगम से बात की गई, पहले 6.5 करोड़ रुपए का प्लान मिला, 2019-20 में हेड ऑफिस से मंजूरी नहीं मिली। सितंबर 2024 में फिर लगभग 9 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाया गया। नगर निगम ने पम्प हाउस बनाने और एक कर्मचारी रखने के लिए कहा। इसे भी मंजूरी नहीं मिली। तब से ये स्पष्ट नहीं है कि अस्पताल को पानी कैसे मिलेगा। दूरस्थ इलाके और परिवहन की कमी बनी बड़ी बाधा
ईएसआईसी अस्पताल के लाभार्थी निम्न आय वर्ग वाले कामगार हैं। इस लिहाज से यहां डॉक्टर से परामर्श लेने के लिए यहां आना खर्चीला है। गुरुवार से रायगढ़ के कबीर चौक से अस्पताल तक एक बस तीन फेरे लगाएगी लेकिन सारंगढ़, जांजगीर-चांपा या सक्ती से यहां तक पहुंचना मुश्किल है। अस्पताल से नजदीकी रेलवे स्टेशन किरोड़ीमल नगर की दूरी 5.5 और भूपदेवपुर की दूरी 7 किलोमीटर है। स्टेशन से अस्पताल पहुंचने के लिए कोई साधन नहीं है। निजी वाहन से आएं तो 300 से 500 रुपए तक लगेंगे। इसलिए अस्पताल खुलने के दो साल बाद भी यहां मरीज नहीं आ रहे हैं।
नगर निगम के पास बसें हैं, करार करके चलाएं
अस्पताल में मरीजों के नहीं आने की बड़ी वजह यहां पहुंचे के साधन की कमी है। हमने एक बस चलाई है। नगर निगम के पास बसें हैं, हमसे करार कर ले, बसें चलाएं। पानी के लिए हेडऑफिस को प्रस्ताव भेजा है, मंजूरी की प्रतीक्षा है। यहां तक पाइपलाइन डाली जाए तो ग्रामीणों को भी पानी मिल सकेगा। जिला प्रशासन से आश्वासन मिला है, पानी की व्यवस्था होने पर मरीजों की भर्ती शुरू की जाएगी।
– हिमांशु अतील, डिप्टी डायरेक्टर, ईएसआईसी अस्पताल


