छत्तीसगढ़ जलसंसाधन विभाग में पहली बार सुपरिटेंडेंट इंजीनियर को पदोन्नत कर चीफ इंजीनियर बनाए जाने के साथ ही एक सीई को सीधे विभाग का प्रमुख बनाया जाएगा। वर्तमान ईएनसी इंद्रजीत उइके की संविदा नियुक्ति मार्च में खत्म होने जा रही है। उइके की संविदा खत्म होते ही विभाग को अपना नया मुखिया मिल जाएगा। दरअसल विभाग में अफसरों की कमी और प्रमोशन में कई विवादों के कारण इस तरह की स्थिति निर्मित हो रही है। दरअसल इतने बड़े विभाग में एक भी सीई नहीं हैं। एक मात्र चीफ इंजीनियर पिछले महीने ही सेवानिवृत्त हुए हैं। चूंकि एसई से सीई पद पर पदोन्नति के लिए पात्रता की शर्तों के कारण कोई भी अफसर सीई पद पर प्रमोट नहीं हो पाता इसे देखते हुए पिछले महीने हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में एसई से सीई पद पर प्रमोशन के लिए पात्रता में तीन साल की छूट प्रदान की गई है। इसके बाद चीफ इंजीनियर पद पर पदोन्नति का रास्ता साफ हो गया है। विभाग के अफसरों का कहना है कि चीफ इंजीनियर के आठ पद खाली हैं। इन रिक्तियों को भरने के लिए आठ एसई को सीई पद पर प्रमोट किया जाएगा। चूंकि विभाग में ईएनसी का पद भी संविदा पर चल रहा है। ऐसे में विभाग ने नए ईएनसी की तलाश भी शुरू कर दी है। विभाग में अफसरों की भारी कमी
दरअसल विभाग की इंजीनियरिंग व्यवस्था फिलहाल गंभीर रिक्तियों से जूझ रही है। चीफ इंजीनियर के 8 स्वीकृत पद पूरी तरह खाली हैं। सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर (एसई) के 30 पदों में से 20 रिक्त हैं। 106 एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (ईई) पदों में 96 पदों पर पदस्थापना है, जबकि असिस्टेंट इंजीनियर (एई) के 250 स्वीकृत पदों में भी बड़ी संख्या में रिक्तियां बनी हुई हैं। विभाग के अफसरों के मुताबिक एई के पदों पर भर्ती का फार्मूला तय है जिसमें 25 प्रतिशत पद लोक सेवा आयोग के माध्यम से और शेष पदोन्नति से भरे जाएंगे। लेकिन सब इंजीनियर स्तर पर स्थिति और अधिक चिंताजनक है। विभाग में करीब 600 सब इंजीनियर पद खाली हैं। इनमें से 100 पदों पर वर्ष 2025 में व्यापमं के जरिए भर्ती प्रस्तावित है, जिससे फील्ड स्तर की इंजीनियरिंग व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। फोन और मैसेज का नहीं दिया जवाब: विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो को इस संबंध में जानकारी लेने के लिए फोन लगाया गया और मैसेज भी किया गया। लेकिन उनकी ओर से कोई भी रिप्लाई नहीं आया।


