मधुकम खादगढ़ा स्थित शिव दुर्गा मंदिर लेन में भारी संख्या में पुलिसबलों का जमावड़ा लगा है। 5 पोकलेन लाइन से दहाड़ने को खड़ा है। एक आेर इसका विरोध हो रहा है तो दूसरी आेर महिलाएं दहाड़ मारकर रो रही हैं। झोपड़ीनुमा घर में रह रही सुषमा देवी अपने को रोक नहीं पाती हैं। रोते हुए हाथ जोड़कर कहती हैं… सब बर्बाद हो गया बाबू। मेरे ससुर इस जमीन को लेकर घर बनाए थे। हम यहीं ब्याह कर आए थे। पति रिक्शा चलाता है। समय के साथ 9 बेटियां हुई। 3 के हाथ किसी तरह पीले हुए, अभी भी 6 बची हैं। अब सभी बेटियों के सिर से छत भी छिन गया। प्रमिला देवी रोते कहती हैं कि जमीन का पैसा दो बार दिया गया, लेकिन जमीन मालिक ने धोखा दे दिया। परिवार में 15 लोग हैं। अब सबको लेकर कहां जाएं। विधायक पहुंचे पर कोर्ट का आदेश देख आग्रह कर लौट गए : नगर निगम के चुनाव के बीच प्रशासन की इस कार्रवाई से राजनीति गरमा गई। पार्षद पद के कई उम्मीदवार के करीबी लोगों के दर्द पर मरहम लगाने पहुंच गए। इसकी सूचना रांची विधायक सीपी सिंह को भी दी गई। सीपी सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रशासन के पदाधिकारियों से कागजात मांगे। जब हाईकोर्ट का आदेश दिखाया गया तो उन्होंने इतना ही कहा कि अभी मौसम सही नहीं है। सभी गरीब लोग हैं। इन्हें कोर्ट जाने तक मोहलत दे दें। लेकिन पदाधिकारियों ने कुछ भी सुनने से इंकार कर दिया। यह देख सीपी सिंह कुछ समय देने का आग्रह करके वहां से चले गए। बड़ा सवाल… पूंजी गई, धोखाधड़ी से लिए गए पैसे कौन लौटाएगा मीना देवी, प्रमिला, अजय साव, रंजीत साव, विक्की कुमार सहित अन्य लोग जिनके घर टूटे उन्होंने दो बार जमीन का पैसा दिया। जमीन मालिक महादेव तिर्की ने 2020 में सभी भवन मालिकों से प्रति कट्टा 5.25 लाख रुपए की दर से एक करोड़ से अधिक रुपया वसूल लिया। अब वह पैसा कौन लौटाएगा। क्योंकि, जीवन भर की जमापूंजी के घर भी हाथ से चला गया। कार्रवाई क्यों… मूल रैयत ने 13 लोगों पर केस कर वापस मांगी जमीन मौजा मधुकम के खाता संख्या 179 के प्लॉट संख्या 319 की 48 डिसमील जमीन महादेव उरांव उर्फ महादेव तिर्की की थी। महादेव के पूर्वजों ने जमीन को 1980 में रामचंद्र को बेचा। रामचंद्र ने 1984 में इसे प्लॉटिंग कर 13 लोगों को बेचा। मूल रैयत ने 13 लोगों पर केस करके जमीन वापसी की मांग की। एसएआर कोर्ट आैर हाईकोर्ट में मामला गया, जहां से रैयत को जमीन वापसी का आदेश हुआ। कार्रवाई के दौरान उत्तेजित हो गए लोग। घरों को जमींदोज करता पोकलेन। अपने आशियाने को टूटते देख रोतीं महिलाएं। आदिवासी खाता की जमीन गैर आदिवासी नहीं खरीद सकता सिविल कोर्ट के वकील सुरेंद्र कुमार ने कहा कि आदिवासी खाता की जमीन गैर आदिवासी नहीं खरीद सकता। सीएनटी की कुछ धारा के तहत डीसी की स्वीकृति के बाद ही जमीन ली जा सकती है। पर रांची में बड़े पैमाने पर आदिवासी जमीन की अवैध तरीके से खरीद-बिक्री हो रही है। सादा पट्टा बनाकर, जमीन मालिक व खरीदार के बीच समझौता हो रहा है। दलाल करोड़ों वसूल रहे हैं। इसके बाद जमीन वापसी का खेल हो रहा है। केस से गरीबों का भयादोहन होता है। विवादित जमीन लेने से दूर रहना ही बेहतर है।


