ड्रोन सर्वे से रेवेन्यू बढ़ाने में उलझा खान विभाग:लीजधारकों का आरोप- सर्वे से पहले उन्हें सूचना तक नहीं दी गई, करोड़ों की पेनल्टी पर विवाद

प्रदेश में अवैध खनन और खनिज परिवहन पर रोक के साथ राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से हर खदान का ड्रोन सर्वे कराने की प्रक्रिया अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। खान विभाग का दावा है कि ड्रोन सर्वे से लीज क्षेत्र के आसपास हुए अवैध खनन को पकड़कर पेनल्टी वसूली जाएगी, लेकिन व्यवहार में यह प्रक्रिया खुद विभाग के लिए उलझन बनती जा रही है। विभाग निजी कंपनियों के माध्यम से ड्रोन सर्वे करवा रहा है। आरोप है कि सर्वे के दौरान पूरी खदान के पूरे पिट (खड़े) को ही खनिज मानकर उसका वॉल्यूम निकाला जा रहा है और उसी आधार पर पेनल्टी तय की जा रही है। जबकि वास्तविकता यह है कि खनन के दौरान मिनरल के साथ ओवरबर्डन, वेस्ट, मिट्टी व अन्य सामग्री भी निकलती है। इसके बावजूद पूरे खड़े को खनिज मानकर करोड़ों रुपए की पेनल्टी थोप दी जा रही है। लीजधारकों का आरोप है कि कई मामलों में ड्रोन सर्वे से पहले उन्हें कोई सूचना तक नहीं दी गई। इससे विवाद बढ़ते गए और अब कई मामले न्यायालय तक पहुंच चुके हैं। भास्कर एक्सपर्ट- पीआर आमेटा, सेवानिवृत्त अतिरिक्त खान निदेशक लीजधारक को सूचना देना जरूरी ड्रोन सर्वे नियमानुसार उचित है, लेकिन इसकी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। लीजधारक को पूर्व सूचना देना अनिवार्य है। सर्वे के दौरान विभाग के जियोलॉजिस्ट से वॉल्यूम की जांच होनी चाहिए, जिसमें ओवरबर्डन, वेस्ट और बाहर पड़े माल को घटाकर रिपोर्ट बने। अभी निजी कंपनियां अचानक जाकर सर्वे कर रही हैं, विभागीय टीम साथ नहीं होती। इससे सर्वे रिजल्ट पर सवाल उठते हैं। कई मामलों में 10 से 50 करोड़ रुपए तक की पेनल्टी लगा दी गई है, जबकि न उतना मिनरल निकला और न ही उतना मौजूद था। मिनरल की ग्रेड के आधार पर ही राशि तय होनी चाहिए। नियमों के अनुसार 10 गुना तक दंड का प्रावधान एसपी शर्मा, एसएमई उदयपुर जोन ने कहा कि ड्रोन सर्वे की सूचना दी जाती है। कुछ लोग बीमारी या अन्य कारण बताकर सर्वे टालने का प्रयास करते हैं। कई लीज 30 साल पुरानी हैं, उस समय रॉयल्टी कम थी। अवैध खनन पकड़े जाने पर उस तिथि के अनुसार पेनल्टी तय होती है, जिसमें नियमों के तहत 10 गुना तक दंड लगाया जा सकता है। बता दें कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 23 जनवरी को खान विभाग द्वारा ड्रोन सर्वे के आधार पर जारी किए गए शो-कॉज नोटिसों को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया।

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