श्रीगंगानगर| सीबीएसई की 10वीं बोर्ड परीक्षा 17 फरवरी से शुरू होगी। इस बार परीक्षा सिर्फ मार्कशीट तक सीमित नहीं रहेगी। बोर्ड ने परीक्षा प्रणाली में बदलाव किया है। अब 10वीं की परीक्षा साल में दो बार होगी। पहली परीक्षा फरवरी-मार्च में अनिवार्य रहेगी। दूसरी परीक्षा मई-जून में करवाई जाएगी। श्रीगंगानगर जिले में सीबीएसई बोर्ड की 10वीं परीक्षा में करीब 3500 विद्यार्थी शामिल होंगे। इस नई व्यवस्था से फेल होने पर पूरा साल बर्बाद नहीं होगा। छात्र उसी सत्र में दोबारा परीक्षा देकर पास हो सकेंगे। पास होने पर 11वीं में उसी साल प्रवेश मिलेगा। जो छात्र अपने अंकों से संतुष्ट नहीं होंगे, उन्हें भी दोबारा मौका मिलेगा। वे अधिकतम तीन विषयों में दोबारा परीक्षा दे सकेंगे। इससे हाई स्कूल में बेहतर अंक लाने का मौका मिलेगा। इस बदलाव का असर स्कूलों की पढ़ाई पर भी पड़ेगा। सीबीएसई कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा की कॉपियों की जांच इस वर्ष से ऑन स्क्रीन मार्किंग के माध्यम से होगी। कॉपियों की जांच फिजिकल मोड के बजाय ऑन स्क्रीन मार्किंग द्वारा निर्धारित सख्त मार्किंग स्कीम के तहत शिक्षकों द्वारा की जाएगी। इसके लिए एजेंसी का चयन किया जा रहा है। यह प्रक्रिया निष्पक्षता के लिए चरणबद्ध तरीके से लागू होगी। शिक्षक उत्तरों को सीबीएसई द्वारा जारी मार्किंग स्कीम के आधार पर जांचेंगे। सही स्टेप्स और की वर्ड्स पर अंक दिए जाते हैं, जिससे स्टेप-मार्किंग का लाभ मिलता है। बोर्ड का मानना है कि इस कदम से समय बचेगा, गलतियां कम से कम होंगी, मूल्यांकन की सटीकता बढ़ेगी और यह सिस्टम ज्यादा पारदर्शिता लाएगा। यह सफल रहा तो अगले साल से 10वीं में भी लागू किया जा सकता है। डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम के तहत परीक्षकों को आंसर शीट्स स्कैन कर कंप्यूटर की स्क्रीन पर उपलब्ध करवाई जाएगी। शिक्षक ऑनस्क्रीन कॉपियों की जांच करेंगे। स्कूलों ने बढ़ाई रफ्तार, फरवरी तक पूरा करना होगा सिलेबस: अब स्कूलों को फरवरी तक पूरा सिलेबस खत्म करना होगा। कई स्कूलों ने पढ़ाई की रफ्तार बढ़ा दी है। फरवरी में परीक्षा देने के बाद पास छात्र 11वीं की पढ़ाई शुरू करेंगे। फेल या कंपार्टमेंट में आए छात्रों को मार्च-अप्रैल में विशेष तैयारी कराई जाएगी। अब तक 10वीं में फेल होने पर छात्र को पूरा साल दोहराना पड़ता था। सीबीएसई स्कूल के प्रधानाचार्य एमएस विग के अनुसार इससे मानसिक दबाव बढ़ता था। कई छात्र पढ़ाई छोड़ देते थे। नई व्यवस्था से छात्रों को दूसरा मौका मिलेगा। इससे ड्रॉपआउट कम होंगे ।


