झांसी मंडल के रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ) का ट्रैकर डॉग तूफान मंगलवार को अपने दस साल के सेवाकाल के बाद सेवानिवृत्त हो गया। इस अवसर पर आरपीएफ लाइन परिसर में विशेष फेयरवेल समारोह आयोजित किया गया। यहां तूफान और उसके डॉग स्क्वायड के अन्य साथियों के लिए फेयरवेल पार्टी रखी गई। समारोह के दौरान तूफान और उसके साथी डॉग्स को उनका पसंदीदा भोजन और बिस्कुट दिया गया। अधिकारियों और जवानों ने तूफान को फूलमाला पहनाकर सम्मानित किया और मुकुट लगाकर विदाई दी। समारोह में मौजूद कई जवान भावुक नजर आए, क्योंकि तूफान केवल एक डॉग नहीं बल्कि वर्षों तक फोर्स का अभिन्न हिस्सा बनकर काम करता रहा। दो तस्वीर देखेिए…
एक दशक तक आरपीएफ का भरोसेमंद सिपाही रहा आरपीएफ ने वर्ष 2016 में ट्रैकर डॉग तूफान की तैनाती झांसी मंडल में की थी। तब से लेकर अब तक तूफान ने रेलवे स्टेशन, ट्रेनों और ट्रैक पर होने वाली चोरियों व अपराधों के खुलासे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपने पूरे सेवाकाल के दौरान तूफान ने लगभग 25 शातिर चोरों को पकड़वाने में मदद की। कई ऐसे ब्लाइंड केस रहे, जिनमें आरपीएफ को कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था, लेकिन तूफान ने अपनी सूंघने की क्षमता और ट्रैकिंग स्किल से चंद मिनटों में ही रास्ता खोज लिया। आरपीएफ अधिकारियों के मुताबिक, तूफान की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी शांत रहते हुए सटीक दिशा पकड़ लेता था। हैंडलर से था खास भावनात्मक रिश्ता तूफान के साथ तैनात डॉग हैंडलर का कहना है कि वह हर ड्यूटी के दौरान पूरी सतर्कता के साथ काम करता था। ट्रेनिंग से लेकर फील्ड ऑपरेशन तक, तूफान ने कभी भी लापरवाही नहीं दिखाई।
हैंडलर ने बताया कि कई बार रात के अंधेरे में, जंगल और सुनसान इलाकों में भी तूफान ने बिना घबराए अपराधियों तक पहुंचने में मदद की। इतने वर्षों तक साथ रहने के कारण तूफान और हैंडलर के बीच गहरा भावनात्मक रिश्ता बन गया था। बीएसएफ कैंप से मिली थी विशेष ट्रेनिंग जर्मन शेफर्ड नस्ल के तूफान को हैदराबाद से लाकर आरपीएफ में शामिल किया गया था। उसकी मां सायरा और पिता रुस्तम भी भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके हैं। आरपीएफ असिस्टेंट कमांडेंट के.एन. तिवारी ने बताया कि आरपीएफ में शामिल होने से पहले तूफान की ट्रेनिंग ग्वालियर स्थित टेकनपुर बीएसएफ कैंप में कराई गई थी। वहां से ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वह झांसी आरपीएफ डॉग स्क्वायड का स्थायी सदस्य बना। तूफान की मदद से खुलीं कई बड़ी चोरियां केस-1 साल 2021 में ललितपुर रेलवे स्टेशन के पास लेवल क्रॉसिंग से 20 बैटरियां चोरी हुई थीं। तूफान ने करीब डेढ़ किलोमीटर तक जंगल की ओर ट्रैक कर झाड़ियों में छिपी बैटरियां बरामद कराईं और चोरों तक पहुंचाया। केस-2 अप्रैल 2022 में झांसी-बीना रेलखंड पर तीसरी लाइन के लिए बिछाई गई लाखों रुपये कीमत की ओएचई केबल चोरी हुई। तूफान की मदद से केबल बरामद हुई और आरोपी गिरफ्तार किए गए। सेवानिवृत्ति के बाद सुरक्षित जीवन आरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि सेवानिवृत्ति के बाद तूफान की देखभाल के लिए आगरा की एक पशु प्रेमी संस्था से संपर्क किया गया है, जहां उसकी नियमित देखभाल, भोजन और स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि फोर्स को ऐसे जांबाज डॉग्स पर गर्व है, जिन्होंने बिना किसी स्वार्थ के देश और समाज की सेवा की। गणतंत्र दिवस परेड का आकर्षण रहा था तूफान रिटायरमेंट से पहले ट्रैकर डॉग तूफान ने अपने सेवाकाल की अंतिम गणतंत्र दिवस परेड में भी भाग लिया था। परेड के दौरान तूफान ने अधिकारियों के सामने लाइव प्रदर्शन करते हुए यह दिखाया कि यदि कोई व्यक्ति चोरी कर सामान लेकर भीड़ में छिप जाए, तो भी वह उससे बच नहीं सकता। प्रदर्शन के दौरान तूफान ने चोरी कर भीड़ में छिपे व्यक्ति को खोजकर पकड़ लिया, जिसे देखकर मौजूद लोग हैरान रह गए। परेड के समापन से पहले तूफान ने झांसी मंडल के डीआरएम अनिरुद्ध कुमार को आखिरी सलामी भी दी। आरपीएफ असिस्टेंट कमांडेंट के.एन. तिवारी ने बताया कि फोर्स के नियमों के अनुसार किसी भी डॉग को दस साल की सेवा के बाद सेवानिवृत्त कर दिया जाता है। इसी नियम के तहत तूफान को भी भारी मन और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के साथ विदा किया गया।


