राजस्थान नर्सिंगकर्मी भर्ती पैटर्न में संशोधन की तैयारी:देनी पड़ सकती है लिखित परीक्षा, आंदोलन पर अभ्यर्थी, स्वास्थ्य विभाग नियमों में संशोधन पर कर रहा मंथन

राजस्थान में नर्सिंग और पैरामेडिकल भर्ती के पैटर्न में बदलाव की आशंका के चलते विवाद खड़ा हो गया है। यह भर्ती अब तक मेरिट और बोनस अंकों के आधार पर होती आई है। अब स्वास्थ्य विभाग ने भर्ती प्रक्रिया में संशोधन की तैयारी कर ली है। माना जा रहा है इस बार लिखित परीक्षा कराई जा सकती है। संविदा पर लगे नर्सिंगकर्मी पुराने पैटर्न यानी मैरिट और बोनस अंकों के जरिए ही नियमित भर्ती करने की मांग कर रहे हैं। दूसरा फ्रैशर्स पुराने पैटर्न में कई विसंगतियों का हवाला देते हुए लिखित परीक्षा के जरिए ही नियमित भर्ती की मांग पर अड़े हैं। भास्कर ने दोनों पक्षों से बातकर जाना कि क्या है पूरा मामला? पढ़िए इस रिपोर्ट में… स्वास्थ्य विभाग के लेटर से शुरू हुआ विवाद
इस विवाद का कारण स्वास्थ्य विभाग में चल रही सेवा नियमों में संशोधन की प्रक्रिया है। नर्सिंग और पैरामेडिकल के प्रदेशभर में 2 हजार से ज्यादा पद खाली चल रहे हैं। इन पदों पर नई भर्ती से पहले स्वास्थ्य विभाग ने 13 जनवरी को एक पत्र जारी किया था। इस पत्र में बताया गया कि राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधीनस्थ सेवा नियम 1965 में संशोधन प्रक्रियाधीन है। संशोधन के बाद प्रदेशभर में रिक्त चल रहे नियमित पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हालांकि इस लेटर में यह नहीं बताया गया कि भर्ती प्रक्रिया में किस तरह का बदलाव किया जाएगा। यही वजह है कि संशोधन की बात को लेकर ही संविदा पर काम कर रहे अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति है। अब तक मेरिट और बोनस अंकों के जरिए ही होती रही है भर्ती
स्वास्थ्य विभाग में अब तक मेरिट और बोनस अंकों के जरिए डायरेक्ट भर्ती होती आ रही है। भर्ती में किसी प्रकार की कोई परीक्षा नहीं ली जाती। इसमें अभ्यर्थी के शैक्षणिक अंकों (जैसे नर्सिंग/पैरामेडिकल डिप्लोमा/डिग्री के फाइनल मार्क्स) के आधार पर मेरिट बनती है। मेरिट में संविदा पर लगे कार्मिकों को 1 साल की सर्विस होने पर 10, 2 साल की सर्विस होने पर 20 और 3 या इससे अधिक साल की सर्विस होने पर 30 बोनस अंक दिए जाते हैं। इन बोनस नंबरों का फायदा सीधे संविदा पर काम कर रहे नर्सिंगकर्मियों को मिलता है, जबकि फ्रेशर्स अभ्यर्थी मेरिट में पिछड़ जाते हैं। यही कारण है कि जब भी कोई भर्ती निकलती है तो संविदाकर्मियों और फ्रेश अभ्यर्थियों में विवाद शुरू हो जाता है। अब स्वास्थ्य विभाग भर्ती प्रक्रिया में संशोधन करने की तैयारी में है। सूत्र बताते हैं कि इस बार दोनों पक्षों में विवाद रोकने के लिए बोनस अंक के साथ-साथ लिखित परीक्षा का नियम जोड़ा जा सकता है। यानी सभी तरह के अभ्यर्थियों को एग्जाम के नंबरों के आधार पर ही अपनी योग्यता साबित करनी होगी। पुराने पैटर्न पर भर्ती की मांग कर रहे संविदा कर्मियों के तर्क
संविदा पर काम कर रहे कार्मिकों का कहना है कि प्रदेशभर में हजारों कर्मचारी कम वेतन में सिर्फ इस भरोसे से काम कर रहे हैं कि भविष्य में नियमित भर्ती होने पर उन्हें बोनस अंकों का लाभ मिलेगा। संविदा कर्मियों का कहना है कि पूर्व में हुई भर्ती प्रक्रियाएं भी मेरिट और बोनस अंकों के जरिए ही हुई हैं। इसलिए अब इस नियम में बदलाव करने की कोई आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। राजस्थान नर्सेज भर्ती संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष अभिषेक शर्मा ने कहा- एक संविदाकर्मी महज 8 हजार रुपए महीने की सैलरी में काम करता है। राज्य सरकार ही एजेंसी के जरिए संविदा पर कार्मिकों की भर्ती करती है। अब सुनने में आ रहा है कि लिखित परीक्षा का नियम भी जोड़ा जाएगा। अगर लिखित परीक्षा से भर्ती होती है तो संविदा पर काम करने वाला कार्मिक कोचिंग में पढ़ने वाले अभ्यर्थियों से बराबरी कैसे कर पाएंगे। कई संविदाकर्मी उम्र के उस पड़ाव पर आ गए हैं कि वो अब पूरी तरह पढ़ाई पर भी ध्यान नहीं दे सकते हैं। लिखित परीक्षा से भर्ती की डिमांड कर रहे अभ्यर्थियों का तर्क
जॉइंट वर्किंग कमेटी के शंकर चौधरी ने कहा- लिखित परीक्षा होने पर प्रदेश से बोनस माफिया का खात्मा हो जाएगा। संविदा भर्तियों में भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़ा और भाई-भतीजावाद खूब होता है। पैसे देकर या मंत्री-विधायकों की डिजायर पर भी नियुक्ति हो जाती है। ऐसे में फ्रेश अभ्यर्थी को मौका ही नहीं मिल पाता है। इस कारण से हजारों टैलेंटेड नर्सिंग कर्मी आज भी बेरोजगार हैं। शंकर चौधरी ने बताया हमारा कहना यही है कि लिखित परीक्षा के जरिए ही भर्ती होनी चाहिए। एक फ्रेशर की मैरिट भले ही कितनी ही अच्छी हो, बोनस अंक मिलने के कारण संविदा कर्मियों को ज्यादा मौका मिलता है। यही कारण है कि हर भर्ती में संविदा पर लगे लगभग सभी अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिल पाती है, जबकि फ्रेश अभ्यर्थी पिछड़ जाते हैं। 2 हजार से ज्यादा पदों पर भर्ती प्रस्तावित
नर्सिंग ऑफिसर-2023 में 8750 पदों पर भर्ती हुई थी। इसमें ANM के 3736 और पैरामेडिकल के 3745 पदों पर भर्तियां की गई थीं। यह भर्ती भी मेरिट और बोनस अंकों के जरिए हुई थी। भर्ती कैलेंडर के अनुसार इस साल दिसंबर में 2000 नर्सिंग और पैरमेडिकल पदों पर भर्ती होनी है। राजस्थान बजट 2025-26 में भी नए पदों पर ऐलान हो सकता है। नियमों में संशोधन को लेकर मंथन जारी
स्वास्थ्य विभाग में आगामी नर्सिंग और पैरामेडिकल पदों पर भर्ती के नियमों में संशोधन को लेकर मंथन जारी है। अभी तक अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। माना जा रहा है कि संशोधन तय है, लेकिन इसमें दोनों ही पक्षों का ध्यान रखा जाएगा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आगामी भर्ती लिखित परीक्षा के जरिए ही कराने की तैयारी है। इसमें संविदा कार्मिकों के लिए बोनस अंकों का वेटेज कम किया जा सकता है।

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