डिप्टी सीएम दीया कुमारी आज राजस्थान का बजट पेश करेंगीं। बजट से शहर के लोगों को भी कई उम्मीदें हैं। हालांकि पिछले बजट में जो घोषणाएं की गई थी, उनमें से अभी तक पूरी नहीं हो पाई हैं। इस बजट में जोधपुर को विकास की बड़ी छलांग की उम्मीद है। शहरवासियों की निगाहें ड्रेनेज सिस्टम पर टिकी हैं, जहां हर बरसात में जलभराव की मार झेलनी पड़ती है। ऐसे में ड्रेनेज मास्टर प्लान की मांग जोर पकड़ चुकी है, जिससे शहर की पुरानी समस्या का स्थायी समाधान हो सके। पर्यटन की बात की जाए तो इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए नाइट टूरिज्म पैकेज की उम्मीद है। शहर के मेहरानगढ़ किला, घंटाघर और पुराने शहर को रात के जादू से जोड़ने वाली यह योजना पर्यटकों को आकर्षित करेगी। जोजरी और लूणी नदी के प्रदूषण से मुक्ति पेयजल में उम्मेद सागर बांध के पूर्ण जीर्णोद्धार पर भी नजरें हैं। अतिक्रमण मुक्त होने के बाद इसे स्टोरेज सेंटर के रूप में विकसित करने की मांग तेज हो गई है। वहीं जोजरी और लूणी नदी के प्रदूषण से मुक्ति के लिए जीरो लिक्विड डिस्चार्ज या कच्छ के रण तक पाइपलाइन से पानी पहुंचाने का प्लान बजट में शामिल किए जाने की उम्मीद है। स्वास्थ्य क्षेत्र में एमडीएम अस्पताल को नया आईपीडी टावर, कैथ लैब और दो विभागों की सौगात मिलने की उम्मीद इस बजट से है। एमजीएच में पेलिएटिव केयर व स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर, पावटा अस्पताल में सीटी स्कैन और बीजेएस पीएचसी को सीएचसी में अपग्रेड करने की मांगें भी प्रबल हैं। आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए गणेश मंदिर के तीसरे चरण का विकास और पंचकुंडा की पहाड़ियों को नए पर्यटन केंद्र के रूप में संवारने की अपेक्षा है। बजट से इन योजनाओं को हरी झंडी मिलने पर शहर की तस्वीर बदल जाएगी। ये अटके काम पूरे होने की उम्मीद पिछले बजट में राजीव गांधी लिफ्ट कैनाल परियोजना के लिए आवंटित बजट के समय सीमा निकालने के बाद भी पूरा नहीं हो सका है। काम की रफ्तार धीमी है। पर्यटन के लिए ट्रैवल मार्ट और हॉप ऑन हॉप ऑन जैसी बस सुविधा भी पिछले बजट में घोषणा की गई थी लेकिन धरातल पर नहीं उतर सकी। फिनटेक इंस्टीट्यूट के लिए 238 करोड रुपए का प्रावधान किया गया था लेकिन यह परियोजना फिलहाल रुकी हुई है। एमबीएम यूनिवर्सिटी में पेट्रो कैंपस के लिए बजट मिला था लेकिन धरातल पर नहीं उतारा जा सका।


