हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित पीपली में महर्षि दयानंद सरस्वती और स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में 12 दिवसीय चतुर्वेद पारायण महायज्ञ का आयोजन किया गया। इस आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम में डीडवाना निवासी वर्ल्ड पीस हार्मनी राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद ने भाग लिया। महायज्ञ में संयोजक स्वामी संपूर्णानंद सरस्वती, हरियाणा के पूर्व राज्य मंत्री सुभाष सुधा, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बांसुरी वादक उस्ताद डॉ. मुजतबा हुसैन और अंतरराष्ट्रीय विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार सहित कई संत-महात्मा, विद्वान और श्रद्धालु उपस्थित रहे। हरियाणा समेत विभिन्न राज्यों से आए धर्मप्रेमियों की भागीदारी ने इस आयोजन को भारतीय संस्कृति, परंपरा और सभ्यता के उत्सव में बदल दिया। इस अवसर पर संबोधित करते हुए गुलाम नबी आजाद ने महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों को समाज के लिए आज भी प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद ने ‘वेदों की ओर लौटो’ का संदेश दिया, अंधविश्वासों का विरोध किया और शिक्षा, विशेषकर नारी शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया। गुलाम नबी आजाद ने ऐसे आयोजनों को साझा सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने वाला बताया। उन्होंने देश में आपसी भाईचारा बनाए रखने, शिक्षा को बढ़ावा देने और समाज से बुराइयों को दूर करने का आह्वान किया। उनके अनुसार, सत्य, सद्भाव और इंसानियत के मार्ग पर चलना ही महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों का सच्चा सम्मान है।


