इस बजट से हनुमानगढ़ जिले को कई महत्वपूर्ण घोषणाओं की उम्मीद है। जिले के नागरिक, जनप्रतिनिधि और विभिन्न सामाजिक संगठन बजट पर अपनी निगाहें जमाए हुए हैं।
जिले के लोग वित्त मंत्री दिया कुमारी के बजट भाषण में नई योजनाओं और पिछली घोषणाओं को आगे बढ़ाने के रोडमैप की अपेक्षा कर रहे हैं। हनुमानगढ़ एक कृषि प्रधान जिला है, इसलिए किसानों से संबंधित मांगें प्रमुखता से उठाई गई हैं। इसके अतिरिक्त, शहरी विस्तार के साथ-साथ बुनियादी ढांचे के विकास की भी अपेक्षाएं हैं। जिले की प्रमुख मांगों में हनुमानगढ़ शहर के लिए 200 करोड़ रुपए की स्वच्छ पेयजल योजना शामिल है। शहरी क्षेत्र में वेस्ट वॉटर ड्रेनेज सिस्टम का विकास और शहरी सीमा में शामिल हुई नई पंचायतों के क्षेत्रों का समग्र विकास भी मांगा गया है। कृषि क्षेत्र से संबंधित मांगों में सेमनाला में व्यर्थ बह रहे 500 क्यूसेक पानी को पंपिंग सिस्टम से एसएसडब्ल्यू नहर में डालकर कृषि भूमि को ‘राइस बेल्ट’ बनाने की योजना शामिल है। कृषि आधारित क्लस्टर की शुरुआत, विशेषकर किन्नू और राइस बेल्ट घोषित करने की मांग भी उठाई गई है। नहरी तंत्र के सुदृढ़ीकरण और खालों के निर्माण के लिए भी बजट प्रावधान की अपेक्षा है। कनेक्टिविटी के संदर्भ में, भद्रकाली में कॉजवे की जगह पुल निर्माण के लिए बजट प्रावधान की मांग की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों की विभिन्न सड़कों के निर्माण और सुदृढ़ीकरण के लिए भी राशि की अपेक्षा है। इसके अलावा, हनुमानगढ़ शहर में साइकिल ट्रैक के निर्माण और जिला मुख्यालय पर नए बस स्टैंड के लिए पर्याप्त बजट प्रावधान की मांग की गई है। घग्घर रिवर फ्रंट परियोजना के लिए 200 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी अपेक्षित है। पिछले बजट की कई घोषणाएं पूरी होने का भी इंतजार
पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में हनुमानगढ़ शहरी क्षेत्र के लिए कई बड़ी घोषणाएं हुई थीं, जो अभी तक कागजों से बाहर नहीं निकल पाईं। घग्घर नदी की लाइनिंग पक्की करने के लिए 325 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था, ताकि बाढ़ की स्थिति में शहर डूबने की आशंका कम हो और नदी की वहन क्षमता बढ़ सके, लेकिन फिलहाल केवल डीपीआर तैयार हुई है, काम शुरू नहीं हो पाया। इसी तरह 200 करोड़ की लागत से बाइपास रोड बनाने की घोषणा भी अधूरी है। पहले जमीन के बदले मुआवजा देने की योजना थी, अब सरकार ने प्रदेश की 10 बाइपास सड़कों के लिए जमीन के बदले जमीन देने का निर्णय लिया है, जिसके कारण प्रक्रिया और उलझ गई है और काम आगे नहीं बढ़ सका है। आरयूबी बनाने का प्रावधान भी था शामिल
घोषणाओं में जंक्शन स्थित चूना फाटक पर 35 करोड़ की लागत से आरयूबी बनाने का प्रावधान भी शामिल था। सबसे व्यस्त इस फाटक पर आरयूबी बनने से गांधीनगर अंडरपास पर वाहनों का दबाव घटता, लेकिन नक्शा और डिजाइन की उलझन के कारण निर्माण शुरू नहीं हो पाया। राजीव गांधी स्टेडियम में एथलेटिक्स के लिए सिंथेटिक ट्रैक की घोषणा को भी अभी वित्तीय स्वीकृति नहीं मिली है, जिससे खिलाड़ियों को सामान्य ट्रैक पर ही अभ्यास करना पड़ रहा है और कई को ट्रेनिंग के लिए अन्य जिलों का रुख करना पड़ता है। जिला मुख्यालय पर 1 करोड़ की लागत से रोडवेज बस स्टैंड की घोषणा भी लंबित है, जबकि नगरपरिषद स्तर पर बाइपास रोड पर बस स्टैंड के लिए भूमि आरक्षित कर चारदीवारी तक शुरू करवा दी गई है।


