बैतालरानी घाटी में हाल ही में एक गौर (इंडियन बाइसन) की मौजूदगी दर्ज की गई है। इससे इलाके की समृद्ध जैव विविधता एक बार फिर चर्चा में आ गई है। मंगलवार शाम करीब 5 बजे घाटी के ऊपरी हिस्से में गौर देखा गया खुडमूड़ी निवासी सत्यदेव चंदेल ने इसे मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड किया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि गौर मुख्य सड़क से करीब 20 मीटर की दूरी पर खड़ा था। कुछ देर तक राहगीर उसे देखते रहे। इसके बाद वह शांतिपूर्वक जंगल की ओर चला गया। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि बैतालरानी घाटी और उससे जुड़ी मैकाल रेंज जैव विविधता की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। यहां घने जंगल, प्राकृतिक जलस्रोत और कई तरह के वन्यजीव मौजूद हैं, जो इस क्षेत्र को पारिस्थितिक रूप से समृद्ध बनाते हैं। मैकाल रेंज वन्यजीवों का प्राकृतिक रास्ता मैकाल पर्वतमाला सतपुड़ा श्रृंखला का हिस्सा है। इस वजह से यह इलाका कई संरक्षित वन क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। यह क्षेत्र वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए एक प्राकृतिक कॉरिडोर का काम करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि गौर की मौजूदगी यह संकेत देती है कि इस क्षेत्र का वन आवास अभी भी काफी हद तक सुरक्षित और अनुकूल है। संरक्षित प्रजाति है गौर गौर भारत की संरक्षित और संवेदनशील वन्यजीव प्रजातियों में शामिल है। बढ़ते मानव हस्तक्षेप और आवासीय दबाव के कारण इसके प्राकृतिक क्षेत्र लगातार प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में बैतालरानी घाटी में गौर का दिखना स्थानीय पर्यावरण के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। यह वन संरक्षण की जरूरत को भी सामने लाता है। वन विभाग ने बढ़ाई गश्त घटना के बाद वन विभाग ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है। गौर की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। वन विभाग ने स्थानीय लोगों और राहगीरों से अपील की है कि वे वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें और भीड़ न लगाएं। इससे इंसानों और वन्यजीवों की सुरक्षा बनी रहेगी। सामूहिक प्रयास से सुरक्षित रह सकती है घाटी वन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्थानीय समुदाय, प्रशासन और वन विभाग मिलकर संरक्षण पर ध्यान दें, तो बैतालरानी घाटी और मैकाल रेंज आने वाले वर्षों में भी जैव विविधता का सुरक्षित और जीवंत केंद्र बनी रह सकती है। भारतीय गौर और वन भैंसा में क्या अंतर है? भारतीय गौर (गौर/इंडियन बाइसन) का शरीर ऊंचा होता है। इसके कंधों पर उभार साफ नजर आता है। इसकी पीठ सीधी और ऊपर उठी होती है। रंग आमतौर पर गहरे भूरे से काले तक होता है। इसके सींग छोटे होते हैं, जो ऊपर की ओर मुड़े रहते हैं और अंदर की तरफ घुमावदार होते हैं। वहीं वन भैंसा (Wild Water Buffalo) का शरीर ज्यादा चौड़ा और भारी होता है। इसकी पीठ अपेक्षाकृत समतल होती है। इसका रंग गहरा स्लेटी-काला होता है। इसके सींग बहुत बड़े, चौड़े और अर्धचंद्राकार फैलाव वाले होते हैं। गौर अधिकतर पहाड़ी और घने जंगलों में झुंड में रहता है। जबकि वन भैंसा अक्सर दलदली इलाकों और नदी-नालों के पास पाया जाता है। यही शारीरिक बनावट और रहने की जगह का फर्क कई बार लोगों में भ्रम पैदा करता है।


