कांग्रेस ने राष्ट्रीय संगठन में बड़ा बदलाव किया है। छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल को AICC महासचिव बनाया गया है। साथ ही बघेल को पंजाब का प्रदेश प्रभारी भी बनाया गया है। इसी के साथ दैनिक भास्कर डिजिटल की खबर पर भी मुहर लग गई है। दैनिक भास्कर ने पहले ही बताया था कि, कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन में बड़ा बदलाव हो सकता है। भूपेश बघेल को बड़ी जिम्मेदारी मिलने के बाद अब टीएस सिंहदेव को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपे जाने की भी चर्चा है। भूपेश बघेल फिलहाल दिल्ली में ही मौजूद हैं। भूपेश बघेल को राष्ट्रीय महासचिव बनाना कांग्रेस के ‘राजस्थान फॉर्मूले’ से मिलता-जुलता कदम माना जा रहा है। कई राज्यों के प्रभारी बदले लोकसभा चुनाव में हार के बाद कई राज्यों के प्रभारियों को भी कांग्रेस हाईकमान ने बदल दिया गया है। मध्य प्रदेश में भी आलाकमान ने भंवर जितेंद्र सिंह को हटाकर हरीश चौधरी को कांग्रेस का नया प्रभारी बनाया है। हरीश चौधरी राजस्थान के वरिष्ठ नेता और विधायक है। बता दें कि भंवर जितेंद्र सिंह के पास दो राज्यों की जिम्मेदारी थी। मध्य प्रदेश के अलावा वे असम के भी प्रभारी थे। इसके अलावा, बिहार कांग्रेस के नए प्रभारी कृष्ण अल्लावरु नियुक्त किये गए हैं। वहीं बिहार के पड़ोसी राज्य झारखंड का प्रभारी के.राजू को बनाया गया है। छत्तीसगढ़ में भी अपनाया गया ‘राजस्थान फॉर्मूला’ सचिन पायलट की तरह छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को राष्ट्रीय महासचिव बनाना कांग्रेस के ‘राजस्थान फॉर्मूले’ से मिलता-जुलता कदम माना जा रहा है। पहले जानिए क्या है क्या है राजस्थान फॉर्मूला? राजस्थान में सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच लंबे समय से तनातनी चल रही थी। 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी हाईकमान ने संतुलन साधने के लिए सचिन पायलट को राष्ट्रीय महासचिव बनाकर छत्तीसगढ़ का प्रभारी नियुक्त कर दिया। इससे दो चीजें हुईं: भूपेश बघेल पर कैसे लागू होता है यह फॉर्मूला? छत्तीसगढ़ में नेतृत्व संतुलन: राष्ट्रीय राजनीति में बघेल की भूमिका बढ़ाना: समीकरण जो बदलाव की वजह बने इस समय कई समीकरण बदलाव की वजह बन रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व प्रदेश में बड़े नेताओं के बीच खींचतान को खत्म करने और एकता बहाल करने के मकसद के लिए ये बड़ा कदम उठाने जा रहा है। पंजाब में कांग्रेस को फिर से खड़ा करने की जिम्मेदारी पंजाब में कांग्रेस कमजोर हो चुकी है, और आम आदमी पार्टी (AAP) बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। बघेल को प्रभारी बनाना दिखाता है कि कांग्रेस आक्रामक रणनीति अपनाना चाहती है। 2022 के विधानसभा चुनाव में पंजाब में कांग्रेस की हार के बाद से पार्टी वहाँ संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। भाजपा के खिलाफ आक्रामक नेता बघेल की भाजपा-विरोधी रणनीति हमेशा आक्रामक रही है। कांग्रेस उन्हें भाजपा के खिलाफ एक मजबूत चेहरा बनाकर पेश कर सकती है, खासकर आगामी लोकसभा चुनाव 2029 के लिए। प्रदेश अध्यक्ष को लेकर टीएस सिंहदेव के नाम की चर्चा सियासी गलियारों में ये भी खबर है कि भूपेश बघेल को AICC में महासचिव की जिम्मेदारी देने के बाद टीएस सिंहदेव को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है। हालांकि इसे लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। दरअसल विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा में भी कांग्रेस की परफॉर्मेंस छत्तीसगढ़ में अच्छी नहीं रही। अब राज्यों में संगठन को मजबूत करने के लिए प्रदेश अध्यक्ष समेत कार्यकारिणी में भी बदलाव किए जाने के संकेत मिल रहे हैं। महंत ने कहा था- अगला चुनाव टीएस सिंहदेव के नेतृत्व में होगा नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने अंबिकापुर में नगरीय निकाय चुनाव के प्रचार के दौरान कहा था कि अगला विधानसभा चुनाव टीएस सिंहदेव के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। उन्होंने मीडिया से चर्चा में कहा था कि पिछले चुनाव में कांग्रेस एक नहीं थी, इस वजह से चुनाव हारे, लेकिन अब सभी एक हैं और अगले चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनेगी। उस समय पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव भी वहां मौजूद थे।


