बूंदी जिले को स्वच्छता के मानचित्र पर अग्रणी बनाने के लिए प्रशासन ने ‘मिशन मोड’ में कार्य शुरू कर दिया है। आगामी 28 फरवरी तक पूरे जिले को ‘सम्पूर्ण स्वच्छ जिला’ घोषित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके तहत गांवों में प्रत्यक्ष दृश्यमान स्वच्छता सुनिश्चित की जाएगी। यह महत्वपूर्ण निर्णय जिला स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की कार्यकारी परिषद की बैठक में लिया गया। इस बैठक में वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना का भी अनुमोदन किया गया। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रवि वर्मा ने अधिकारियों को ‘स्वच्छ गांव, विकसित गांव’ की परिकल्पना को साकार करने के निर्देश दिए। कोई ढिलाई नहीं बरतने पर जोर
सीईओ वर्मा ने निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरतने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी प्रगतिरत कार्यों को 28 फरवरी तक अनिवार्य रूप से पूरा किया जाए। इसी तिथि तक शौचालय विहीन राजकीय विद्यालयों में सामुदायिक स्वच्छता कॉम्प्लेक्स या मिनी टॉयलेट का निर्माण भी सुनिश्चित किया जाना है। इसके अलावा 31 मार्च तक ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन, कचरा संग्रहण केंद्र और नए सामुदायिक स्वच्छता कॉम्प्लेक्स के निर्माण कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। 7 दिन में वीडीओ मास्टर डाटा करेंगे अपलोड
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार जल्द ही ‘स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण मोबाइल ऐप’ लॉन्च करेगी। इस ऐप के माध्यम से आम नागरिक भी सफाई की वास्तविक स्थिति का अवलोकन कर सकेंगे। ग्राम विकास अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आगामी 7 दिनों के भीतर सभी ग्राम पंचायतों का मास्टर डाटा पोर्टल पर अपलोड करें। कचरा प्रबंधन पर हुई विशेष चर्चा
बैठक में ग्राम सथूर में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट (PWMU), ग्राम डाबी में एफएसटीपी/एफएसएम (FSTP/FSM) और ग्राम तालेड़ा में टाइगर बायो फिल्टर प्रोजेक्ट (TBFP) और तरल कचरा प्रबंधन पर विशेष चर्चा की गई।
सीईओ ने शिक्षा विभाग के मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों के साथ-साथ महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों से स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में पेयजल तथा क्रियाशील शौचालयों की स्थिति पर प्रतिक्रिया ली और रेट्रोफिटिंग कार्य कराने के निर्देश दिए।


