भारतीय किसान यूनियन एकता संघर्ष ने अमेरिकी भारत के बीच हुई ट्रेड डील के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। संगठन की ओर से आज सभी जिला और डीसी मुख्यालयों पर विशाल मार्च निकाला गया। इस दौरान किसानों ने मोदी और ट्रंप के पुतले फूंके और सरकार विरोधी नारे लगाए। मीडिया से बातचीत करते हुए किसान नेताओं ने कहा कि यह ट्रेड डील भारत के किसानों, डेयरी किसानों, छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के लिए बेहद नुकसानदेह साबित होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने अमेरिकी दबाव के आगे झुककर देश के हितों से समझौता किया है। किसान नेताओं के अनुसार, जो सरकार खुद को ‘विश्व गुरु’ बताती थी, वह आज अमेरिका के सामने पूरी तरह से सरेंडर कर चुकी है। किसान नेता बोले- किसान पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा किसान नेताओं जसविंदर सिंह और पलविंदर सिंह ने यह भी कहा कि इस समझौते को लेकर देश की जनता को कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। पहले अमेरिका के अधिकारियों के ट्वीट के माध्यम से ही इस डील का खुलासा हुआ। सरकार दावा कर रही है कि सोयाबीन को बाहर रखा गया है, लेकिन हकीकत यह है कि सोयाबीन तेल और मक्के से जुड़े उत्पाद बड़े पैमाने पर आयात किए जाएंगे। जिससे देश का किसान पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा। उन्होंने बताया कि अमेरिका के किसानों के पास सैकड़ों एकड़ जमीन है और उन्हें करोड़ों रुपये की सब्सिडी मिलती है, जबकि भारत का किसान औसतन एक से डेढ़ एकड़ जमीन का मालिक है और उसे 12 हजार रुपये की सहायता भी सही ढंग से नहीं मिलती। ऐसे हालात में भारतीय किसान अमेरिकी किसानों से मुकाबला नहीं कर सकते। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि यह ट्रेड डील रद्द नहीं की गई तो आने वाले दिनों में भाजपा सरकार के खिलाफ देशभर में बड़ा और तीखा आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पुतला दहन केवल शुरुआत है और जल्द ही यह संघर्ष जनआंदोलन का रूप लेकर सरकार को घेर लेगा।


