धौलपुर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और प्रयत्न संस्था द्वारा संचालित परियोजना ‘कवच’ के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय सीएमपीओ कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत एडीआर परिसर स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मीटिंग हॉल में हुई। कार्यक्रम का आयोजन राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर द्वारा जारी एक्शन प्लान की पालना में तथा अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण धौलपुर संजीव मागो के निर्देशन में किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ सचिव रेखा यादव, अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक हवा सिंह, अध्यक्ष बाल कल्याण समिति मधु शर्मा एवं सदस्य माजिद सरिफी द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। सचिव रेखा यादव ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा नालसा (आशा—जागरूकता, समर्थन, सहायता और कार्यवाही) मानक संचालन प्रक्रिया “बाल विवाह मुक्ति की ओर अग्रसर 2025” लागू की गई है। इसका उद्देश्य बाल विवाह जैसी कुप्रथा का उन्मूलन, पीड़ित बच्चों को त्वरित कानूनी सहायता और पुनर्वास उपलब्ध कराना तथा जन-जागरूकता को सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत यह एक दंडनीय अपराध है। यादव ने “न्याय आपके द्वार” अभियान, मीडियेशन फॉर द नेशन 2.0, राष्ट्रीय लोक अदालत, नालसा हेल्पलाइन 15100, पॉश एक्ट, पीड़ित प्रतिकर स्कीम एवं “नई चेतना 4.0” अभियान की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि जन उपयोगी सेवाओं से संबंधित शिकायतों के निस्तारण हेतु 10 नवंबर 2025 से 10 फरवरी 2026 तक स्थायी लोक अदालत के माध्यम से समाधान किया जा रहा है, जिसके लिए अधिकृत मोबाइल नंबर 9119365734 जारी है। अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक हवा सिंह ने कहा कि बाल विवाह समाज की प्रगति में बाधा है और इसके उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। अध्यक्ष मधु शर्मा ने बाल विवाह की कानूनी आयु एवं इसके दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला। सदस्य माजिद सरिफी ने बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक प्रभावों पर चिंता व्यक्त की। असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल मीता अग्रवाल ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों की जानकारी दी। इस अवसर पर परियोजना अधिकारी रजनी जैन एवं जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक वीरेंद्र सिंह जांगल सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।


