सिंगर सिदधू के पेरेंट्स एसएसपी आफिस धरने पर बैठे:बोले- पुलिस नहीं कर रहीं सुनवाई, सीएम का ओएसडी केस को प्रभावित कर रहा है

दिवंगत पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला के माता-पिता चरण कौर और बलकौर सिंह छोटे सिदधू ने मानसा एसएसपी आफिस के बाहर बैठकर धरना दिया। उन्होंने कहा कि उनके बेटे की कमाई का हक जानने का पूरा हक है। लेकिन पुलिस आरोपियों का साथ दे रही है। वन डिजिटल कंपनी और उसके मैनेजर बंटी बैंस के खिलाफ कार्रवाई की मांग की मांग रहे है। लेकिन जून 2025 से उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीएम पंजाब को ओएसडी भी इसमें खेल रहा है। पहले हमारा बेटा मरवा दिया, अब उसकी कमाई खाने के पीछे पड़े हुए।धरने के दौरान बठिंडा रेंज के डीआईजी हरजीत सिंह ने मूसेवाला के माता-पिता से बातचीत की। डीआईजी ने दो दिनों के भीतर शिकायतों पर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। वहीं, सिद्धू परिवार ने साफ कहा कि अगर उन्हें इंसाफ नहीं मिला तो वह संघर्ष के लिए मजबूत हो जाएंगे। अब जानिए मीडिया से सिद्धू के माता पिता क्या बोले – पहले खाकी वाले गैंगस्टरों को काबू करो बलकौर सिंह ने कहा कि छह जून 2025 को मैं इस एसएसपी ऑफिस की सीढ़ियां चढ़ रहा हूं। न मेरी शिकायत पर कोई कार्रवाई करते हैं और न शिकायत वापस करते हैं। पांच दिन हो गए हैं पूरे, मेरी शिकायत बंद लिफाफे में एसएसपी रखकर बैठे हैं। कौन से गैंगस्टरों के खिलाफ बोलोगे आप? पहले खाकी वाले गैंगस्टरों को काबू करो, जहां बैठे हैं। आपने मानसा में लूट करवा रखी है। मेरे जैसे 60-60 साल के दोनों बच्चे को लेकर धरने पर बैठे हैं। हमारा कसूर क्या है? मजबूरी में स्टैप उठाया शायद हमारी कोई सुन ले
सरकार का टैक्स देते हैं, बनी हुई सारी अदायगी करते हैं। आप हमें मारने पर बैठे गए हैं। प्लीज, हम आपके सहारे बैठे थे। आप हमारा यह हाल करोगे, हमें यह उम्मीद नहीं थी। पहले इन्वेस्टिगेशन का क्या किया? मेरे बेटे के कत्ल का क्या किया? अब जिसके सहारे हम रोटी खाते थे, उसका क्या हाल किया आपने? पुलिस उस समय तक पुलिस है, जब पीड़ित का पक्ष सुनती है। जब पुलिस दोषियों के साथ मिल जाए तो खाकी में इससे बड़ा गुंडा नहीं हो सकता। मजबूरी में मुझे यह स्टेप उठाना पड़ा है। शायद डीआईजी साहब आए हैं, मजबूरी में मेरा पक्ष सुन लें। अब जुल्म की हद हो गई है मैं अफसरों से उम्मीद करता हूं कि अगर मेरी शिकायत गलत है तो मुझे बताकर जाओ। यह उठा भाई, तेरा कुछ नहीं बनता, केस को वापस लो। कहां पर जाऊं? आप सारे सत्कारयोग्य हैं, बताओ कहां पर जाऊं।
डीजीपी तक मैं जा चुका हूं। फिर हाथ जोड़कर कहता हूं कि मेरे मामले को सार्वजनिक न किया जाए, लेकिन सबसे पहले उसे सार्वजनिक किया जाता है। जुल्म की कोई हद होती है। हमें हाथ पकड़कर धक्का देकर बाहर निकाल दो, हम किसी और साइड चले जाएंगे। इतना जुल्म क्यों करते हो? बेटे की स्टेटमेंट लेने का हक नहीं है क्या सीएम साहब को मैं बताना चाहता हूं कि एक साइड आप गैंगस्टरों के खिलाफ प्रहार करते हो। प्रहार कहां करते हो? सीएम का ओएसडी छह महीने से सारे केस को प्रभावित कर रहा है। क्या फायदा उठाया मैंने सीएम का? हां, सरकार ड्रामे करती है। इज्जतदार सीनियर सिटीजन हैं, लेकिन पुलिस के पीछे जाना पड़ रहा है। हमारी जायज मांग है। क्या मुझे अपने बेटे की कंपनी की स्टेटमेंट लेने का हक नहीं है? मेरे बेटे का कारोबार है। अगर मैं पूछूं कि मुझे महीने का कारोबार बता दो और कोई न दे, तो मैं किसके पास जाऊं? ईडी के पास जाऊं, सीबीआई के पास जाऊं या मानसा पुलिस के पास जाऊं? मुझे रास्ता तो बताओ, किसके पास जाऊं। इतना धक्का क्यों किया? मेरे पास देने के लिए रिश्वत नहीं छह दिन हो गए, मेरी शिकायत लिफाफे में है। सारी डाक निकाल देते हैं, लेकिन मेरी शिकायत नहीं निकालते। मेरे पास देने के लिए रिश्वत नहीं है। कहां से दूं? बेटा मार दिया, कमाई सारी खा गए, कहां से दूं?
किसी अधिकारी के पास मेरी बात का जवाब है? पता नहीं इन पर कौन सा दबाव है। कहावत है कि कुत्ती चोरों से मिली हुई है। सिद्धू के पिता ने कहा कि मानसा पुलिस भ्रष्ट है। यह फाइल नहीं, मेरे पुत्र का खून है। मानसा पुलिस ने सारे गैंगस्टर भगाए हैं। दिल्ली पुलिस ने पकड़े थे। सीआईए में वीआईपी सुविधाएं दीं। हम फिर भी चुप कर गए।
तेरा पुत्र मर गया, तेरे पीछे कोई नहीं, तू चुप कर जा।आपके भी बाल-बच्चे हैं, एक दिन भुगतोगे। गैंगस्टर को लेकर सीआईए इंचार्ज घूमता रहा हो, क्या इस बारे में एसएसपी को पता न हो?
हम तो चार साल से मरे हुए हैं। हमें कम से कम यह कह दो कि शिकायत गलत है। मां बोली -पहले बेटा मरवा दिया, अब कमाई पर डाका सिद्धू की मां ने कहा कि हमें यहां आने का शौक नहीं था। अब हारकर यहां आए हैं। जून महीने से हम यहां आ रहे हैं। हार्ट के मरीज हैं सिद्धू के पिता, पांच स्टंट पड़े हुए हैं। रोज कचहरियों के चक्कर लगाते हुए क्या अच्छे लगते हैं? हमने तो अपना हिसाब नहीं मांगा, किसी से कोई गलत चीज नहीं मांगी। पहले हमारा बेटा मरवा दिया, अब बेटे की कमाई पर डाका मारते हो। हम अपने बच्चे को कैसे पालेंगे? हम आपके सामने इसलिए आए हैं कि कम से कम पब्लिक तो हमारी सुने। वह आरोपी तो इंटरव्यू देकर कह गए कि हमारा कोई लेन-देन नहीं है। हमें पता है, हमारे साथ बैठकर बात तो करें। हमें सिर्फ इंसाफ चाहिए। इन्हें रोज लारा लगा देते हैं कि फाइल यहां गई, फाइल वहां गई।

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