राजस्थान में कहावत है, बिना घी का चूरमा बनाना। यानी, स्वादिष्ठ चूरमा भी बन गया और घी भी नहीं लगा। उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने राजनीतिक चतुराई से इस बार उन घोषणाओं पर फोकस किया है, जिनमें पैसा कम खर्च हो, लेकिन असर ज्यादा दिखे। जैसे, बजट में खेल किट के साथ जादुई पिटारा देना। जादुई पिटारा राजस्थान की सियासत को भी सूट करता है। साथ ही, 323 करोड़ के खर्च में हर घर में चर्चा भी बटोरी जा सकती है। हालांकि ये योजना धरातल पर उतरने के बाद ही समझ आएगी कि कागज की ये चमक हकीकत में कितनी मिठास लाती है। दूसरा, राजनीति तराजू के दोनों पलड़ों को बैलेंस भी कर दिया गया। क्योंकि बजट के बाद सबसे बड़ा सवाल है एक लाख भर्तियों की घोषणा क्यों नहीं हुई? इसका सीधा सा जवाब है कि उपमुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के लिए ये घोषणा बचा कर रख ली। बजट रिप्लाई के बाद संभवत: एप्रोपिएशन बिल की बहस का जवाब देते हुए सीएम ये घोषणा करेंगे। एप्रोपिएशन बिल मिनी बजट की तरह पेश होगा। पिछले लंबे समय से ये ट्रेंड है कि बजट रिप्लाई और एप्रोपिएशन बिल में बड़ी घोषणाएं होती हैं। भजनलाल सरकार के तीसरे पूरे बजट को कुछ सवालों के जवाबों से समझते हैं… बजट कैसा है? लोकलुभावन है। हालांकि मिड सेशन का बजट है। सरकार को अभी दो साल ही पूरे हुए हैं। ऐसे में अभी इकॉनोमी सुधार पर फोकस किया है। हालांकि कोई नया टैक्स नहीं लगाया है। दूसरा बजट देखकर लग रहा है कि नई घोषणाएं करने के बजाय पिछले बजटों की पुरानी घोषणाएं हैं, उनको पूरा करने पर फोकस किया गया है। बजट में इंफ्रा, महिलाओं, किसानों पर भी फोकस दिखता है। कुल मिलाकर 2026 का बजट ‘इंफ्रास्ट्रक्चर’ और ‘वेलफेयर’ के बीच एक बारीक संतुलन बनाने की कोशिश करता दिख रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सरकार इन संकल्पों के माध्यम से आम आदमी की जेब में औसत सालाना आय (जो कि बजट का लक्ष्य है) सुनिश्चित कर पाएगी? बजट का छुपा हुआ गणित क्या है? पंचायत चुनाव और निकाय चुनाव की झलक इसमें दिखती है। कुछ महीनों बाद चुनाव होने हैं। दीया कुमारी ने कृषि बजट में 7 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है। साथ ही इस बजट में इन इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस किया गया है। पहले से चल रहे तारबंदी, फव्वारा और हाईटेक खेती पर दिए जाने वाले अनुदान यानी ऐसी चीजों को टच किया गया है, जिससे किसानों को और आम आदमी को फायदा हो। दूसरा, सरकारी कर्मचारियों के लिए 8वें वेतनमान के लिए कमेटी बनाने की घोषणा की गई है। सरकारी इलाज भी सभी के लिए फ्री कर दिया गया है। दस्तावेज की बाध्यता हटाने से कई लोगों को इसका फायदा होगा। लखपति दीदी’ योजना के तहत कर्ज की सीमा 1 लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख करना और स्वयं सहायता समूहों के लिए 1 करोड़ तक के ऋण का प्रावधान महिला वोटर्स को जोड़ने की कोशिश है। संभागीय मुख्यालयों पर ‘राजसखी स्टोर’ खोलना उनके उत्पादों को बाजार देने की एक बड़ी कोशिश है। ये महिलाओं को जोड़कर रखने में अहम मुद्दा है। राजनीतिक रूप से बजट ने क्या हित साधा? कांग्रेस राजस्थान में यमुना जल समझौता के तहत शेखावाटी में लगातार पानी नहीं आने की बात करती है। कांग्रेस लगातार हमलावर भी रहती है। बजट में शेखावाटी से हथनी कुंड से यमुना के पानी के लिए 32 हजार करोड़ की परियोजना का काम जल्द शुरू करने की घोषणा की गई है। राजस्थान में पिछले साल तीन मुद्दे बेहद गर्माए थे। स्कूल गिरने से बच्चों की मौत, हादसों में मौत और आईसीयू में आग। बजट में इन तीनों को एड्रेस किया गया है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक्शन प्लान की घोषणा भी दी है। हालांकि विपक्ष ने 3000 स्कूलों के क्षतिग्रस्त होने का मुद्दा उठाते हुए 500 करोड़ को नाकाफी बताया है। क्योंकि हाईकोर्ट में सरकार ये तर्क दे चुकी है कि इन स्कूलों को ठीक करने के लिए कम से कम तीन हजार करोड़ रुपए चाहिए। इस बजट के हिसाब से तो कम से कम छह साल लगेंगे। बजट में किन मुद्दों को लेकर जनता को निराशा हुई? बजट में युवाओं के लिए कोई बड़ी घोषणा नहीं है। हालांकि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के आधार पर राजस्थान स्टेट टेस्टिंग एजेंसी की घोषणा की गई है, लेकिन इसका सीधा फायदा नहीं दिखता। क्योंकि राजस्थान में कर्मचारी चयन बोर्ड और राजस्थान लोकसेवा आयोग पहले से हैं। इनके कामकाज को लेकर पहले से बहस चल रही है। ऐसे में एजेंसी बनने के बाद ही फायदा समझ आएगा। युवाओं को नौकरियों की घोषणा की उम्मीद थी। साथ ही ठेका व्यवस्था को खत्म करना चाहते थे। इसकी घोषणा अभी बजट में नहीं हुई है। हालांकि नौकरियों से जुड़ी घोषणा मुख्यमंत्री कर सकते हैं तो अभी एप्रोपिएशन बिल का इंतजार करना पड़ेगा। बजट में सबसे ज्यादा किस संभाग और जिले को मिला? हमेशा की तरह इस बार जयपुर, जोधपुर, कोटा जैसे बड़े शहरों के लिए बहुत कुछ है। हालांकि बजट में हर क्षेत्र का संतुलन बनाने का प्रयास भी दिखता है। बजट में किन सामाजिक और इमोशन मुद्दों को टच करने की कोशिश की गई? अरावली का मुद्दा राजस्थान में काफी गर्माया था। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और अवैध खनन पर बढ़ते शोर के बीच, बजट में अरावली के लिए विशेष प्रावधान करना ‘ग्रीन पॉलिटिक्स’ का हिस्सा है। राजस्थान में प्रकृति से जुड़ाव केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि ‘धार्मिक और सांस्कृतिक’ मुद्दा है। सरकार ने इस बजट के माध्यम से एक “सोशल लाइसेंस” हासिल करने की कोशिश की है। कंपनियों को 10% वृक्षारोपण के लिए मजबूर करना जनता को यह बताने का तरीका है कि “हम कंपनियों के नहीं, आपके साथ हैं।” यह कदम संघर्ष की आग को ठंडा करने के लिए एक ‘स्मार्ट पॉलिसी’ है, लेकिन इसका असली परीक्षण धरातल पर क्रियान्वयन के समय होगा। इसके अलावा राजस्थान वीरों की भूमि है। इस बार बजट में उनके परिवारों के लिए संवेदनशीलता दिखाई गई है। जोधपुर, टोंक और शेरगढ़ में ‘इन्टीग्रेटेड सैनिक कॉम्प्लेक्स’ बनाना और शहीद सैनिकों की बेटियों की स्कॉलरशिप बढ़ाना एक इमोशनल और मजबूत एंगल है। बजट के लिए पैसा कहां से आएगा? घोषणाएं कैसे पूरी होगी? ये बजट 6.10 लाख करोड़ का है। पांच साल में करीब ढाई गुना बढ़ चुका है। सरकारी की जितनी आमदनी है, उसकी आधी राशि से कर्ज चुकाने में चली जाती है। उसके बाद बहुत बड़ा हिस्सा प्रशासनिक हिस्सों वेतन, भत्ते में चला जाता है। इस बार भी बजट में से 2.05 लाख करोड़ तो कर्ज के भुगतान और ब्याज में चला जाएगा। इसके अलावा जितना बजट बढ़ रहा है, उतना ही कर्ज बढ़ रहा है। ऐसे में चुनौती है कि योजनाओं को बिना पैसे धरातल पर कैसे उतारा जाएगा। कर्ज लेकर विकास करने के अलावा सरकार के पास कोई चारा नहीं दिखता। ऐसे में सरकारों को उस साल की घोषणा पर उसी साल चलने की जरूरत है, अन्यथा योजना और खर्चों में भारी बढ़ोतरी होती है। रिफाइनरी, ईआरसीपी इसके ज्वलंत उदाहरण है, जिनकी लागत दो गुना तक बढ़ गई। 4 सबसे बड़ी घोषणाएं और मायने 8वें वेतन आयोग के लिए हाई पावर कमेटी क्यों : आमतौर पर कर्मचारियों की सरकार से शिकायतें रहती है। इस घोषणा से कर्मचारी वर्ग को साधा। सरकार के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास। मायने : राजस्थान में आठ लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारी है। ऐसे में एक बड़े वर्ग को साधने की कोशिश दिखती है। किसानों को 25,000 करोड़ का ब्याज मुक्त लोन क्यों : किसान राजनीति के केंद्र बिन्दु माने जाते हैं। पंचायत चुनावों में पहले उन्हें साधना जरूरी था। मायने : मार्च-अप्रैल में पंचायत चुनाव है। हर सरकार ऐसा करती है। ऐसे में सरकार को माहौल बनाने में फायदा मिलेगा। मेधावी छात्रों को 20,000 का ई-वाउचर क्यों : मेधावी युवाओं को सीधा फायदा देने से वो और उनके परिवार जुड़ेंगे। सरकार की पॉजिटिव ब्रांडिंग होगी। मायने : 10वीं-12वीं के मेधावी छात्रों को लैपटॉप या टैबलेट खरीदने में आर्थिक मदद मिल जाएगी। युवाओं में सरकार के प्रति क्रेज बढ़े इस लिहाज से घोषणा महत्वपूर्ण है। लखपति दीदी योजना में ऋण सीमा बढ़ाई क्यों : राजस्थान से पहले मध्य प्रदेश में ये योजना काफी सफल रही है। सरकार इस योजना के जरिए यहां भी महिला वर्ग में मजबूर पकड़ बनाना चाह रही है। मायने: देश में ज्यादातर चुनाव का रिजल्ट महिला मतदाता तय करती है। हाल ही में बिहार में इसके अच्छे नतीजे देखने को मिले थे। मुख्यमंत्री लखपति दीदी ऋण योजना के तहत ब्याज अनुदान पर दिए जाने वाले ऋण की सीमा ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹1.50 लाख किया गया है। इससे महिला मतदाता सरकार के प्रति आकर्षित होगी।


