देशभर के आंगनवाड़ी केंद्रों को लेकर केंद्र सरकार ने एक बड़ा प्लान तैयार किया है। मिशन पोषण 2.0 के तहत अगले पांच सालों में 2 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों की सूरत बदलने वाली है। इन केंद्रों को न केवल आधुनिक बनाया जाएगा, बल्कि इन्हें पूरी तरह डिजिटल सुविधाओं से भी लैस किया जाएगा। यह जानकारी राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने सदन में दी है। गरासिया ने पूछा था केंद्रों की प्रगति पर सवाल
राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से आंगनवाड़ी केंद्रों के डिजिटलीकरण और मिशन पोषण 2.0 की मौजूदा स्थिति को लेकर सवाल किया था। इसके जवाब में मंत्रालय ने बताया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य पोषण सेवाओं को अधिक पारदर्शी, कुशल और सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाना है। यह पहल बच्चों के सर्वांगीण विकास और महिलाओं के पोषण अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। स्मार्ट क्लास और वाईफाई से लैस होंगे केंद्र
सरकार की योजना के मुताबिक, अब आंगनवाड़ी केंद्रों में पुरानी व्यवस्थाओं की जगह आधुनिक डिजिटल ढांचा नजर आएगा। मंत्रालय ने बताया कि इन केंद्रों पर इंटरनेट और वाईफाई की सुविधा दी जाएगी। बच्चों की पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए वहां एलईडी स्क्रीन, स्मार्ट लर्निंग टूल और ऑडियो-विजुअल उपकरण लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा, केंद्रों पर शुद्ध पानी के लिए वॉटर प्यूरीफायर और बच्चों के खेलने-सीखने के लिए खास तरह की बाल-अनुकूल सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है। पोषण ट्रैकर ऐप से हो रही रियल टाइम मॉनिटरिंग
डिजिटलीकरण की इस मुहिम में ‘पोषण ट्रैकर ऐप’ सबसे अहम भूमिका निभा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह ऐप फिलहाल 24 भाषाओं में काम कर रहा है। इससे देश के करीब 14.02 लाख आंगनवाड़ी केंद्र जुड़ चुके हैं। 31 जनवरी 2026 तक के रिकॉर्ड बताते हैं कि इस ऐप पर 8.90 करोड़ लाभार्थियों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। इस ऐप के जरिए बच्चों की रोजाना की उपस्थिति, उनके विकास की निगरानी, गर्म भोजन और राशन वितरण का पूरा हिसाब-किताब डिजिटल तरीके से रखा जा रहा है। स्मार्टफोन और मशीनों के लिए बजट जारी
मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि राज्यों को तकनीक से जोड़ने के लिए आर्थिक मदद भी दी जा रही है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए स्मार्टफोन और बच्चों के वजन व लंबाई मापने वाले आधुनिक उपकरणों (स्टैडियोमीटर, इंफेंटोमीटर) की खरीद के लिए पैसा भेजा जा रहा है। सरकार एक स्मार्टफोन के लिए 10,000 रुपये प्लस जीएसटी और चार उपकरणों के एक सेट के लिए 8,000 रुपये प्लस जीएसटी की वित्तीय सहायता दे रही है। इस पूरे बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब आंगनवाड़ी की सेवाओं में गड़बड़ी की गुंजाइश कम होगी। रियल टाइम डेटा होने की वजह से जवाबदेही बढ़ेगी और यह पता चल सकेगा कि किस बच्चे या महिला को पोषण का लाभ मिल रहा है और किसे नहीं। इससे समुदाय की भागीदारी भी बढ़ेगी और बाल विकास के लक्ष्यों को हासिल करना आसान होगा।


