नमस्कार सरकार सुविधाएं दे और अधिकारी-कर्मचारी दोनों हाथों से लुटाते रहें, यह सीएम सर को बर्दाश्त नहीं। मुख्यमंत्रीजी च्यवनप्राश तक का हिसाब रखते हैं। धौलपुर में विधायकजी थाने पहुंचे तो न थानेदार मिला न एक भी सिपाही। टोंक में किसान नेता नरेश मीणा की श्रीमतीजी को विधि-विधान से चप्पल पहनाई गई। अजमेर में भाई की शादी में विधायकजी दिल खोलकर नाचे। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. सीएम बोले- आने-जाने में ही पंचकर्म हो जाएगा जयपुर में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के लिए सरकार ने नई जमीन देने का वादा किया। संस्थान में नई लैब और पॉडकास्ट स्टूडियो शुरू किया। गलता जी में हर्बल गार्डन में धनवंतरि उपवन बनाया। संस्थान के विकास और विस्तार के लिए हर मदद का आश्वासन दिया। इसके बावजूद कई कर्मचारी-अधिकारी सुविधाओं का गलत इस्तेमाल करते हैं। ऐसे जिम्मेदारों को मुख्यमंत्रीजी ने खूब खरी-खरी सुनाई। सीएम बोले- सरकार तो काम कर रही है आप भी मेहरबानी कीजिए। एक कर्मचारी को 75 डिब्बे च्यवनप्राश के लिख दिए। इसे क्या माना जाए? फिर मुख्यमंत्री ने पंचकर्म की गड़बड़ का जिक्र किया। बोले- एक नौजवान महीने में 4 बार पंचकर्म करा रहा है। डॉक्टरों से कहना चाहता हूं कि वह नजदीक ही रहकर सर्विस दे रहा होगा। उसे पश्चिमी राजस्थान में ऐसी जगह लगा देते हैं, जहां आने-जाने में ही पंचकर्म हो जाएगा। 2. विधायक बोले- थाने में कुत्ता भी नहीं धौलपुर के बसई डांग थाने के इंचार्ज साहब इतने कॉन्फिडेंट हैं कि उनके रहते इलाके में परिंदा भी पर नहीं मार सकता, अपराध तो दूर की बात है। उनके राज में पूरा राम-राज है। जनता सुखी है। कहीं कोई गड़बड़ नहीं हो रही। लोग शांति का रास्ता छोड़कर इधर-उधर नहीं भटकते। ऐसे में थाने में मौजूद रहने की क्या जरूरत? तो साहब थाने में मौजूद नहीं थे। सारे सिपाही भी थानेदार साहब पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं इसलिए वे भी थाने में नहीं थे। पूरा थाना चौपट था। खाकी वाला एक भी सिपाही नहीं। न जाने कहां से बाड़ी विधायक जसवंत सिंह इसी वक्त वहां पहुंचे और थाने की हर एक कोठरी छान ली। थाने में वर्दीवालों का नामोनिशान नहीं। उन्होंने वहीं परिसर में खड़े होकर थानेदार को फोन लगाया। बोले- हम तुम्हारे थाने में आए हैं। ऐसा तो मैंने पूरे राजस्थान में नहीं देखा कि सिंगल आदमी नहीं है थाने में। फोन के दूसरी तरफ थानेदार साहब खुद हैरान, जवाब दिया- हैं? कोई नहीं है? अजय भी नहीं ? समंदर भी नहीं? विधायक जी का पारा चढ़ा। बोले- न समंदर है न कोई और। कुत्ता तक नहीं है। मैं थाने के अंदर से ही बात कर रहा हूं आपसे। हालांकि जिस वक्त विधायक जी कह रहे थे कि कुत्ता तक नहीं है, उसी वक्त एक डॉगी लाला वहीं तफरी करते नजर आए। 3. भाभीजी को विधि-विधान से पहनाई चप्पल टोंक में भाभीजी ने डेढ़ साल बाद विधि-विधान से चप्पलें पहनीं। हालांकि उनके पति किसान नेता भगतसिंह सेना के प्रमुख नरेश मीणा ने चप्पल पहनने से इनकार कर दिया। वह साल था 2024, जब विधानसभा के उपचुनाव के दौरान उन्होंने टोंक के उखलाना गांव में जूते-चप्पल पहनना छोड़ दिया। पति नंगे पैर घूमे तो पत्नी कैसे चप्पल पहने। तो उनकी पत्नी ने भी चप्पलें त्याग दीं। नरेश मीणा ने कहा- मैंने संकल्प लेकर जूते छोड़े थे। संकल्प पूरा नहीं हुआ है। हाड़ौती के चार बड़े नेताओं को जब तक विधानसभा में जाने से नहीं रोक दूंगा, तब तक जूते नहीं पहनूंगा। हालांकि तुम्हारी भाभी मान जाए तो उसे पहना दो। भाभीजी मान गईं और उन्हें मंच पर ही चप्पल भेंट की गईं। वैसे भाईसाहब को लोग कंधों से उतरने ही नहीं देते, तो जूते-चप्पल की क्या जरूरत? 4. चलते-चलते.. अजमेर के किशनगढ़ से विधायक विकास चौधरी खूब नाचे। छोटे भाई मनोज की शादी का मौका था। ऐसे में बड़े भाई की खुशी देखते ही बन रही थी। माननीयों की तरह नहीं नाचे कि बस नाचे और हाथ जोड़ते हुए मंच से उतर गए। भाई की तरह ही नाचे। बढ़िया सूट-बूट में तैयार होकर। श्रीमतीजी के साथ गदर वाले ‘मैं निकला गड्डी ले के’ गाने के बोल पर धरम पाजी के पुत्तर की तरह नाचे। छोटे भाई ने भाभी पर वार-फेर किया। इसके बाद पत्नी के साथ राजस्थानी गीत पर भी डांस किया। दोस्तों को कैसे निराश करते? उनके साथ पंजाबी गानों पर खूब भंगड़ा स्टाइल दिखाई। इनपुट सहयोग- महेंद्र सैनी (जयपुर) अनिल वर्मा (बाड़ी धौलपुर), महावीर बैरवा (टोंक), भरत मूलचंदानी (अजमेर) वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी..


