पराली जलाना पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए खतरा

लुधियाना। आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के तत्वावधान में गुरु नानक खालसा कॉलेज फॉर वुमेन, गुजरखां कैंपस, मॉडल टाउन के पंजाबी विभाग, पर्यावरण विज्ञान विभाग और इको क्लब द्वारा पराली जलाने पर जागरूकता व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पराली जलाने से उत्पन्न गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी खतरों के प्रति छात्राओं को जागरूक करना और टिकाऊ विकल्पों को बढ़ावा देना था। व्याख्यान में विशेषज्ञों ने पराली जलाने के कारणों, वायु गुणवत्ता, मृदा उर्वरता और मानव स्वास्थ्य पर इसके हानिकारक प्रभावों पर प्रकाश डाला। साथ ही फसल अवशेष प्रबंधन और पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों जैसे व्यावहारिक समाधानों की जानकारी भी दी गई। कार्यक्रम में 76 छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी की और इस समस्या के दीर्घकालिक प्रभावों को समझने में गहरी रुचि दिखाई। कार्यक्रम का आयोजन संकाय सदस्यों के मार्गदर्शन में किया गया, जिन्होंने छात्राओं को अपने समुदायों में जागरूकता फैलाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया। प्रिंसिपल डॉ. मनीता काहलों ने छात्राओं को संबोधित करते हुए टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने छात्राओं से जागरूकता अभियान चलाने और स्वच्छ व स्वस्थ पर्यावरण के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

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