रात 2 से 5 बजे ट्रेन में सोना जोखिम भरा, 71% केस में फोन चोरी, 69% में आरोपियों की पहचान नहीं

रात के 2 से 5 बजे के बीच ट्रेन में सोना अब यात्रियों के लिए सबसे कमजोर पल बनता दिख रहा है। जनवरी से फरवरी की शुरुआत तक दर्ज 42 एफआईआर का रिकॉर्ड बताता है कि इसी समय अंतराल में हर चौथी चोरी हुई। कम से कम 6 मामलों में यात्रियों ने “सोते समय” सामान चोरी होने की शिकायत दर्ज कराई है। इन 42 एफआईआर में से 30 मामले मोबाइल चोरी से जुड़े हैं, यानी करीब 71% घटनाएं केवल मोबाइल पर केंद्रित हैं। इनमें 6 महंगे मॉडल (आईफोन 14, आईफोन 15, आईफोन 15 प्रो, सैमसंग एस-23 व एस-24 अल्ट्रा) शामिल हैं। मोबाइल के अलावा नकदी, जेवर और एटीएम कार्ड चोरी की शिकायतें भी दर्ज हैं। इतना ही नहीं कुल रकम 9.5 लाख रुपये से अधिक है। औसतन हर FIR में 22 हजार रुपये से ज्यादा का नुक्सान भी हो रहा है। आरोपियों की पहचान को लेकर तस्वीर और गंभीर है। 42 में से 29 मामलों यानी लगभग 69% में आरोपी “अज्ञात” दर्ज हैं। केवल 4 FIR में आंशिक जानकारी है। 9 मामलों में ही मोबाइल का आईएमईआई नंबर दर्ज है। जीआरपी में बीते समय में दर्ज हुई कुछ वारदात {22 जनवरी प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर एक यात्री का बैग काटकर 2.5 लाख की हीरे की चूड़ी, मोबाइल और नकदी चोरी की गई। यह “बैग कटिंग” तकनीक का उपयोग दर्शाता है। {17 जनवरी एसी कोच A2 में सोते समय सैमसंग एस24 अल्ट्रा चोरी हुआ। यह बताता है कि अपराधी केवल स्लीपर कोच तक सीमित नहीं हैं। {07 जनवरी ट्रेन नंबर 22480 में सफर कर रही प्रियंका शर्मा का मोबाइल लुधियाना आउटर पर झपटा। शिकायत में “अज्ञात युवक” के नाम दर्ज है। {05 जनवरी शालिमार एक्सप्रेस (14662) में रात 1:30 से 3:20 बजे के बीच दो कोच—S-8 और S-11—में चोरी हुई। AC कोच में भी एक साथ चोरियां, 15 दिन बाद केस दर्ज {ट्रेन पैटर्न भी सवाल खड़े करता है। करीब 30 एफआईआर में ट्रेन नंबर दर्ज है। शालिमार मालानी एक्सप्रेस (14662) में 5 घटनाएं दर्ज हैं। यानी कुल मामलों का लगभग 12% एक ही ट्रेन से जुड़ा है। 5 जनवरी को रात 1:30 से 3:20 बजे के बीच इसी ट्रेन के दो अलग-अलग कोच S-8 और S-11 में अलग-अलग यात्रियों की चोरी दर्ज हुई। एक ही समय अंतराल में दो कोचों में वारदात का दर्ज होना सामान्य चोरी से आगे की आशंका पैदा करता है। झेलम व सचखंड एक्सप्रेस में भी एक से अधिक घटनाएं दर्ज हैं। स्लीपर के साथ AC कोच में भी चोरी की शिकायतें सामने आई हैं, यानी खतरा किसी एक श्रेणी तक सीमित नहीं।

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