राज्य सरकार के बजट में उपनगर कहे जाने वाले गंगाशहर को निराशा ही मिली है। सेटेलाइट अस्पताल को 100 बेड में क्रमोन्नत करने के प्रस्तावों को मंजूरी नहीं मिल सकी। इसके साथ ही 15 डॉक्टरों का अतिरिक्त स्टाफ लगाने और प्रसूति विभाग की यूनिट का मामला भी टल गया है। एसपी मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र वर्मा ने 27 जनवरी को सेटेलाइट हॉस्पिटल का निरीक्षण करने के बाद इसे अपग्रेड करने के प्रस्ताव सरकार को भेजे थे। गंगाशहर नागरिक परिषद को भी पूरी उम्मीद थी कि इस बार हॉस्पिटल का कायाकल्प हो जाएगा, लेकिन बजट घोषणाओं की डिटेल आने के बाद उन्हें गंगाशहर सेटेलाइट हॉस्पिटल के लिए कोई घोषणा नहीं आई। दरअसल गंगाशहर अस्पताल 50 बेड का स्वीकृत है, जबकि वहां काफी स्पेस है। उसे बढ़ाकर 100 बेड किया जा सकता है। लेबर रूम तैयार हो गया है, लेकिन स्टाफ के अभाव में प्रसव की सुविधा 24 घंटे के लिए शुरू नहीं हो पा रही। इसके लिए गायनी, डिप्लोमा इन चाइल्ड और पीडिया के तीन-तीन डॉक्टरों की जरूरत है। ऑपरेशन थिएटर शुरू करने के लिए एक एनेस्थिसिया का डॉक्टर और पांच मेडिकल ऑफिसर चाहिए। इनके अलावा नर्सिंग स्टाफ की भी जरूरत पड़ेगी। गौरतलब है कि गंगाशहर नागरिक परिषद पिछले दो साल से अस्पताल को 100 बेड में क्रमोन्नत करवाने के लिए प्रयास कर रही है। इस संबंध में चिकित्सा मंत्री को भी ज्ञापन दिया जा चुका है। कॉलेज से नए सिरे से प्रस्ताव भेजे गए थे। भाजपा के बड़े नेता गंगाशहर से फिर भी निराशा : राज्य में भाजपा की सरकार है। गंगाशहर ने बड़े नेता दिए हैं। पूर्व महापौर नारायण चौपड़ा, शहर भाजपा अध्यक्ष सुमन छाजेड़, पूर्व न्यास अध्यक्ष महावीर रांका, भाजपा नेता मोहन सुराणा के होते हुए गंगाशहर को मायूस होना पड़ा है। हालांकि गंगाशहर नागरिक परिषद के अध्यक्ष जतन दुगड़ और मोहन सुराणा ने गंगाशहर अस्पताल को अपग्रेड करने के लिए जिले के प्रभारी मंत्री एवं चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर को भी कई बार ज्ञापन दिए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। कॉलेज चाहे तो लेबर रूम शुरू हो सकता है राज्य के बजट में गंगाशहर सेटेलाइट हॉस्पिटल के लिए कोई घोषणा नहीं की गई है। दरअसल गंगाशहर सेटेलाइट हॉस्पिटल एसपी मेडिकल कॉलेज के अधीन है। वहां पर स्टाफ कॉलेज से भेजा जाता है। लेबर रूम को 24 घंटे चलाना और ऑटी शुरू करना कोई मुश्किल काम नहीं है। कॉलेज के गायनी विभाग में काफी डॉक्टर्स हैं। घरों पर निजी प्रेक्टिस अच्छी चलने के कारण सीनियर डॉक्टर वहां जाने में रुचि नहीं दिखाते, जबकि प्रिंसिपल चाहें तो उनका सप्ताहिक रोटेशन बनाया जा सकता है। ऐसे ही एनेस्थिसिया का डॉक्टर भी भेजा सकता है।


